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राजस्थान राज्यसभा चुनाव की सियासी हलचल तेज: तीन सीटों में दो पर बीजेपी, एक पर कांग्रेस का दावा मजबूत

 
राजस्थान राज्यसभा चुनाव की सियासी हलचल तेज: तीन सीटों में दो पर बीजेपी, एक पर कांग्रेस का दावा मजबूत

राजस्थान में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। अगले महीने राज्यसभा की तीन सीटें रिक्त होने जा रही हैं, जिसके चलते प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। आंकड़ों और वर्तमान विधानसभा गणित के आधार पर माना जा रहा है कि इनमें से दो सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और एक सीट पर कांग्रेस की जीत लगभग तय मानी जा रही है।

विधानसभा में मौजूदा विधायकों की संख्या और पार्टी स्थिति को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी के पास दो सीटों पर स्पष्ट बढ़त है, जबकि कांग्रेस एक सीट सुरक्षित करने की स्थिति में दिखाई दे रही है। इसी समीकरण के आधार पर दोनों प्रमुख दल अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं।

सूत्रों के अनुसार, बीजेपी इस बार केवल दो सीटों पर ही अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है। पार्टी नेतृत्व इस बात को ध्यान में रखकर प्रत्याशियों का चयन कर रहा है कि वोटों का बिखराव न हो और दोनों सीटों पर जीत सुनिश्चित की जा सके। पार्टी के भीतर संभावित नामों को लेकर मंथन जारी है और जल्द ही आधिकारिक घोषणा किए जाने की संभावना है।

दूसरी ओर, कांग्रेस भी अपनी एक संभावित सीट को सुरक्षित करने के लिए विधायकों से संपर्क और रणनीति को मजबूत कर रही है। पार्टी नेतृत्व यह सुनिश्चित करने की कोशिश में है कि क्रॉस वोटिंग या किसी प्रकार की राजनीतिक टूट-फूट का असर चुनाव परिणामों पर न पड़े।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि राज्यसभा चुनाव हमेशा से ही संख्या बल पर आधारित होता है, लेकिन कई बार छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों की भूमिका भी निर्णायक साबित होती है। ऐसे में दोनों प्रमुख पार्टियां अपने-अपने समर्थक विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटी हैं।

बीजेपी के भीतर इस बात पर भी चर्चा चल रही है कि उम्मीदवारों का चयन केवल संगठनात्मक आधार पर नहीं बल्कि क्षेत्रीय संतुलन और राजनीतिक अनुभव को ध्यान में रखकर किया जाए। वहीं कांग्रेस अपने मौजूदा विधायकों के भरोसे अपनी एक सीट को बचाने की रणनीति पर काम कर रही है।

राज्यसभा चुनाव को लेकर आने वाले दिनों में सियासी गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है। दोनों दलों की नजर अब निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों पर भी टिकी हुई है, जिनका समर्थन अंतिम परिणाम में अहम भूमिका निभा सकता है।

फिलहाल, राजनीतिक माहौल पूरी तरह चुनावी रंग में रंगता नजर आ रहा है और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह समीकरण अंतिम समय तक कायम रहता है या फिर कोई नया राजनीतिक उलटफेर देखने को मिलता है।