Aapka Rajasthan

राजस्थान पंचायत चुनाव: 1403 जिला परिषद, 8245 पंचायत समिति सदस्य और 457 प्रधान पदों की आरक्षण लॉटरी आज

राजस्थान पंचायत चुनाव: 1403 जिला परिषद, 8245 पंचायत समिति सदस्य और 457 प्रधान पदों की आरक्षण लॉटरी आज
 
राजस्थान पंचायत चुनाव: 1403 जिला परिषद, 8245 पंचायत समिति सदस्य और 457 प्रधान पदों की आरक्षण लॉटरी आज

राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव 2026 की तैयारियां अब निर्णायक दौर में पहुंच गई हैं। बुधवार, 23 सितंबर को प्रदेश के सभी संबंधित जिला मुख्यालयों पर जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और प्रधान पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। इस प्रक्रिया के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि कौन-सी सीट सामान्य, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी या महिला वर्ग के लिए आरक्षित होगी।

पंचायतीराज चुनाव के तहत प्रदेश में 1403 जिला परिषद सदस्य, 8245 पंचायत समिति सदस्य और 457 प्रधान पदों के लिए आरक्षण तय किया जाना है। इससे पहले 41 जिला प्रमुख पदों के आरक्षण की लॉटरी 13 अगस्त को ही निकाली जा चुकी है। अब बुधवार की लॉटरी के बाद जिला परिषद और पंचायत समिति स्तर पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों की तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी।

आरक्षण की लॉटरी के बाद कई संभावित उम्मीदवारों के चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। पिछली बार जिस सीट पर किसी विशेष वर्ग के लिए आरक्षण था, जरूरी नहीं कि इस बार भी वही स्थिति रहे। आरक्षण रोटेशन के तहत सीटों में बदलाव होने से कई दावेदारों को अपने क्षेत्र के बजाय दूसरे वार्ड या क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी करनी पड़ सकती है।

इसके बाद 24 सितंबर को सरपंच और वार्ड पंच पदों के आरक्षण की लॉटरी उपखंड स्तर पर निकाली जाएगी। यानी लगातार दो दिनों में पंचायत चुनाव से जुड़े प्रमुख पदों के आरक्षण की तस्वीर सामने आ जाएगी।

पंचायत चुनाव की आरक्षण लॉटरी पहले 17 और 18 सितंबर को प्रस्तावित थी, लेकिन शहरी निकाय चुनाव में प्रशासनिक अधिकारियों की व्यस्तता के कारण इसे आगे बढ़ाकर 23 और 24 सितंबर किया गया। अब आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव कार्यक्रम जारी किया जाना है।

राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव की पूरी प्रक्रिया 15 नवंबर 2026 तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में 23 और 24 सितंबर की आरक्षण लॉटरी के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी गतिविधियां तेज होने की संभावना है। संभावित प्रत्याशियों की नजर अब अपने-अपने क्षेत्र की आरक्षण स्थिति पर टिकी हुई है।