राजस्थान हाउसिंग बोर्ड ने बढ़ाई जमीनों की आरक्षित दरें, वीडियो में जाने जयपुर की वाटिका योजना में 47% तक महंगे हुए प्लॉट, सस्ते आवास योजना पर उठे सवाल
राजस्थान में आमजन को सस्ते और किफायती आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किए गए राजस्थान हाउसिंग बोर्ड के प्रयासों पर अब जमीनों की बढ़ती कीमतों का असर दिखाई देने लगा है। हाउसिंग बोर्ड प्रशासन ने प्रदेश में अपनी योजनाओं के तहत विकसित कॉलोनियों की आरक्षित दरों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी है। नई दरों में कई योजनाओं में जमीन की कीमतों में भारी इजाफा हुआ है।हाउसिंग बोर्ड ने कभी "हमारा प्रयास-सबको आवास" का नारा देकर आम लोगों को किफायती मकान उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा था, लेकिन लगातार बढ़ती आरक्षित दरों के कारण अब इस उद्देश्य पर सवाल उठने लगे हैं। नई दरों में कुछ योजनाओं में 47 फीसदी तक की बढ़ोतरी की गई है।
वाटिका योजना में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी
हाउसिंग बोर्ड की ओर से जारी नई दरों में सबसे बड़ा बदलाव जयपुर की वाटिका योजना में किया गया है। यहां जमीन की आरक्षित दर में सबसे ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई है।पहले वाटिका योजना में जमीन की आरक्षित दर 7,045 रुपए प्रति वर्गमीटर थी, जिसे बढ़ाकर अब 10,370 रुपए प्रति वर्गमीटर कर दिया गया है। यानी यहां जमीन की कीमत में करीब 47 फीसदी का इजाफा हुआ है।इस बढ़ोतरी के बाद इस योजना में मकान या प्लॉट खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों पर आर्थिक भार बढ़ सकता है।
इंदिरा गांधी नगर में भी बढ़ीं कीमतें
जयपुर के जगतपुरा स्थित इंदिरा गांधी नगर योजना में भी आरक्षित दरों में वृद्धि की गई है। यहां पहले जमीन की आरक्षित दर 23,850 रुपए प्रति वर्गमीटर थी, जो अब बढ़कर 27,355 रुपए प्रति वर्गमीटर हो गई है।इस तरह इस योजना में करीब 14.70 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सांगानेर-प्रताप नगर योजना में भी महंगी हुई जमीन
हाउसिंग बोर्ड ने सांगानेर और प्रताप नगर योजना की आरक्षित दरों में भी बदलाव किया है। यहां जमीन की कीमत 23,870 रुपए प्रति वर्गमीटर से बढ़ाकर 25,900 रुपए प्रति वर्गमीटर कर दी गई है।नई दरें लागू होने के बाद इन योजनाओं में भी आवास खरीदना पहले की तुलना में महंगा हो जाएगा।
आम लोगों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
हाउसिंग बोर्ड की योजनाएं मुख्य रूप से मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों को ध्यान में रखकर तैयार की जाती हैं। ऐसे में आरक्षित दरों में लगातार बढ़ोतरी से आम लोगों के लिए घर खरीदने की चुनौती बढ़ सकती है।विशेषज्ञों का कहना है कि जमीन की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर मकानों की लागत पर पड़ता है। इससे किफायती आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य को झटका लग सकता है।
बोर्ड प्रशासन का तर्क
हालांकि, हाउसिंग बोर्ड प्रशासन जमीन की बाजार कीमतों, विकास कार्यों और अन्य खर्चों को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर आरक्षित दरों में संशोधन करता है। प्रशासन का मानना है कि नई दरें वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार तय की गई हैं।अब देखना होगा कि बढ़ी हुई दरों का हाउसिंग बोर्ड की आगामी आवास योजनाओं और आम लोगों की खरीद क्षमता पर कितना असर पड़ता है।
