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राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रिंसिपल पदों पर पदोन्नति में अनियमितताओं पर रोक लगाई, स्थानांतरण रुके

राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रिंसिपल पदों पर पदोन्नति में अनियमितताओं पर रोक लगाई, स्थानांतरण रुके
 
राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रिंसिपल पदों पर पदोन्नति में अनियमितताओं पर रोक लगाई, स्थानांतरण रुके

राजस्थान हाईकोर्ट ने उच्च माध्यमिक विद्यालयों में प्रिंसिपल पदों पर पदोन्नति के मामलों में सामने आई अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए राज्यभर में प्रस्तावित स्थानांतरण और पदस्थापन पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी 2026 तक के लिए स्थगित कर दी है।

जानकारी के अनुसार, शिक्षकों और कर्मचारी संगठनों द्वारा कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रिंसिपल पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया में अनियमितताएं और पक्षपात किया गया है। उनका कहना था कि पदोन्नति और स्थानांतरण में नियमों का पालन नहीं किया गया और यह प्रक्रिया पारदर्शिता के खिलाफ है।

हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि यदि इन आरोपों की गंभीरता सही पाई जाती है, तो शिक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों के हक को नुकसान पहुँच सकता है। अदालत ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई तक कोई भी स्थानांतरण या पदस्थापन नहीं किया जाएगा।

राज्य शिक्षा विभाग के अधिकारीयों ने अदालत को बताया कि सभी स्थानांतरण और पदस्थापन नियमों के अनुसार किए जा रहे हैं और किसी भी प्रकार का पक्षपात नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने आदेश में कहा कि आरोपों की जांच आवश्यक है और इस प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखना अनिवार्य है।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह फैसला कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है। उनका आरोप था कि कई मामलों में अनुपयुक्त निर्णय और राजनीतिक दबाव के चलते पदोन्नति और स्थानांतरण किए गए हैं। हाईकोर्ट का आदेश इस मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में पदोन्नति और स्थानांतरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का पालन बेहद जरूरी है। किसी भी अनियमितता से न केवल शिक्षकों के मनोबल पर असर पड़ता है, बल्कि छात्रों और स्कूल के संचालन पर भी प्रभाव पड़ता है।

राजस्थान के कई जिलों में प्रस्तावित स्थानांतरण और पदस्थापन की सूची पहले ही जारी की गई थी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद इन स्थानांतरणों पर फिलहाल रोक लग गई है। अधिकारियों ने कहा कि अदालत के निर्देशों का पालन किया जाएगा और अगली सुनवाई तक कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पदोन्नति और स्थानांतरण में किसी भी तरह की अनियमितता पाए जाने पर विभाग के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश राज्य के शिक्षक समुदाय में एक बड़ा संदेश है कि न्यायालय ऐसे मामलों में संजीदगी से कार्रवाई करता है और पारदर्शिता को सुनिश्चित करता है।

आने वाली 27 जनवरी 2026 की सुनवाई में अदालत इस मामले की गहन समीक्षा करेगी और आगे की दिशा तय करेगी। शिक्षा विभाग और कर्मचारी संगठनों को निर्देशित किया गया है कि वे इस मामले से संबंधित सभी दस्तावेज और रिपोर्ट अदालत में पेश करें।

इस फैसले से राज्यभर के उच्च माध्यमिक विद्यालयों में प्रिंसिपल पदों की पदोन्नति और स्थानांतरण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर नई बहस शुरू हो गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के हित में एक सकारात्मक संकेत है।