राजस्थान हाईकोर्ट ने एसीबी की कार्यशैली पर उठाए सवाल, वीडियो में देंखे एफआईआर रद्द
राजस्थान हाईकोर्ट ने एंटी करप्शन ब्यूरो (एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB)) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने नगर निगम ग्रेटर के तत्कालीन वित्तीय सलाहकार अचलेश्वर मीणा के खिलाफ दर्ज एफआईआर और उनके खिलाफ की गई सभी आपराधिक कार्रवाई को रद्द कर दिया है।
यह आदेश जस्टिस चंद्रप्रकाश श्रीमाली की अदालत ने अचलेश्वर मीणा की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा कि बिना पुख्ता सबूत और ठोस सूचना के आधार पर बिना वारंट किसी व्यक्ति के घर की तलाशी लेना कानून के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि जांच एजेंसियों को कार्रवाई करते समय कानून और प्रक्रिया का पूरी तरह पालन करना चाहिए। किसी भी नागरिक के अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता, चाहे मामला किसी भी स्तर का क्यों न हो।
फैसले में कोर्ट ने एसीबी द्वारा की गई फोन टेपिंग प्रक्रिया पर भी गंभीर आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि फोन टेपिंग के दौरान निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया, जो कि कानून के खिलाफ है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और कानूनी अनुमति आवश्यक होती है, जिसका इस मामले में अभाव पाया गया।
हाईकोर्ट के इस निर्णय को जांच एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी जांच को अंजाम देने से पहले सभी कानूनी प्रक्रियाओं और अधिकारों का पालन करना अनिवार्य है।
इस फैसले के बाद एसीबी की कार्यशैली और जांच प्रक्रिया पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। साथ ही, यह मामला इस बात को भी रेखांकित करता है कि जांच एजेंसियों को अपनी कार्रवाई में संतुलन और कानून के दायरे में रहकर ही काम करना चाहिए।
फिलहाल, इस फैसले के बाद संबंधित पक्षों की ओर से आगे की कानूनी रणनीति पर नजरें टिकी हुई हैं। वहीं, यह मामला भविष्य में जांच एजेंसियों के लिए एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
