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राजस्थान हाईकोर्ट का अहम फैसला, वीडियो में देंखे नाबालिग नियुक्ति पर सफाईकर्मी की बर्खास्तगी रद्द

राजस्थान हाईकोर्ट का अहम फैसला, वीडियो में देंखे नाबालिग नियुक्ति पर सफाईकर्मी की बर्खास्तगी रद्द
 
राजस्थान हाईकोर्ट का अहम फैसला, वीडियो में देंखे नाबालिग नियुक्ति पर सफाईकर्मी की बर्खास्तगी रद्द

Rajasthan High Court ने एक महत्वपूर्ण फैसले में सफाईकर्मी को बड़ी राहत देते हुए उसकी बर्खास्तगी को रद्द कर दिया है। यह मामला नगर निगम में कार्यरत सफाईकर्मी Jitendra Meena से जुड़ा है, जिन्हें नियुक्ति के समय उम्र 18 वर्ष से कम होने के आधार पर नौकरी से हटा दिया गया था।जानकारी के अनुसार, जितेंद्र मीणा की नियुक्ति वर्ष 2018 में हुई थी। उस समय उनकी आयु 18 वर्ष से कम थी। करीब साढ़े चार साल तक सेवा देने के बाद नगर निगम ने उनकी नियुक्ति को अवैध मानते हुए उन्हें बर्खास्त कर दिया। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता ने नियुक्ति के समय अपनी उम्र से संबंधित कोई भी तथ्य छिपाया नहीं था। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी अभ्यर्थी ने सही जानकारी दी है, तो उसकी जांच और सत्यापन करना नियोक्ता की जिम्मेदारी होती है।कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि नगर निगम ने न तो आवेदन-पत्र की जांच के दौरान, न चयन प्रक्रिया में और न ही नियुक्ति के समय जरूरी दस्तावेजों का सही तरीके से सत्यापन किया। इस लापरवाही का खामियाजा कर्मचारी को नहीं भुगतना चाहिए।

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी के आदेश को रद्द करते हुए कर्मचारी को राहत प्रदान की। यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है, जहां नियुक्ति प्रक्रिया में हुई प्रशासनिक चूक के कारण कर्मचारियों को नुकसान उठाना पड़ता है।कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से यह स्पष्ट संदेश गया है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और दस्तावेजों का सही सत्यापन बेहद जरूरी है। साथ ही, यदि गलती नियोक्ता की है, तो उसकी सजा कर्मचारी को नहीं दी जा सकती। इस फैसले के बाद नगर निगम और अन्य सरकारी संस्थाओं की भर्ती प्रक्रियाओं पर भी सवाल उठ सकते हैं और उन्हें अपने सिस्टम को और अधिक मजबूत बनाने की जरूरत महसूस हो सकती है।