राजस्थान हाईकोर्ट ने सुनवाई में देरी पर दी बड़ी टिप्पणी, कहा- जमानत देना न्यायिक दृष्टि से जरूरी
राजस्थान हाईकोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया और जमानत के अधिकार को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी मामले की सुनवाई में अत्यधिक देरी हो रही है, तो अभियुक्त को जमानत देने पर विचार करना चाहिए। यह टिप्पणी न्यायिक प्रक्रियाओं में तेजी लाने और न्यायालयों में लंबित मामलों के दबाव को कम करने के प्रयास में आई है।
सुनवाई में देरी पर हाईकोर्ट का रुख
राजस्थान हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि न्यायिक देरी न केवल अभियुक्त के व्यक्तिगत अधिकारों पर असर डालती है, बल्कि समाज में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास को भी कमजोर करती है। कोर्ट ने कहा कि यदि मामले की सुनवाई लंबित रहती है और अभियुक्त पहले से जमानत के लिए योग्य है, तो उसे बिना अनावश्यक देरी के जमानत देना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि लंबित मामलों में समयबद्ध सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अदालतों को आवश्यक कदम उठाने चाहिए। इससे न्याय प्रक्रिया तेज होगी और किसी भी तरह की अन्याय या अत्यधिक हिरासत से बचाव संभव होगा।
न्यायिक देरी के दुष्प्रभाव
विशेषज्ञों का कहना है कि मामले की सुनवाई में लंबी देरी अभियुक्त के जीवन पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। लंबे समय तक जेल में रहने वाले निर्दोष या जमानत योग्य अभियुक्त को मानसिक और सामाजिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। हाईकोर्ट की यह टिप्पणी न्यायिक प्रणाली में संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
अदालतों के लिए दिशा-निर्देश
राजस्थान हाईकोर्ट ने न केवल जमानत देने पर जोर दिया, बल्कि यह भी कहा कि मामलों की सुनवाई में देरी को रोकने के लिए कोर्टों में कार्यप्रणाली को सुव्यवस्थित करना होगा। लंबित मामलों की संख्या घटाने, साक्ष्यों और दलीलों की समय पर समीक्षा करने तथा सुनवाई प्रक्रिया में तेजी लाने के उपाय करने होंगे।
नागरिकों और वकीलों के लिए संदेश
हाईकोर्ट की टिप्पणी से यह स्पष्ट हुआ है कि न्याय प्रणाली में समयबद्ध सुनवाई और उचित जमानत प्रक्रिया की अहमियत सर्वोपरि है। वकीलों और नागरिकों को यह समझना होगा कि लंबित मामलों में जमानत देने का निर्णय सिर्फ कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि मानवाधिकार और न्याय की दिशा में जरूरी कदम है।
