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राजस्थान हाईकोर्ट का नाता प्रथा पर अहम फैसला: रामप्यारी को पति की पेंशन का हक मिला

राजस्थान हाईकोर्ट का नाता प्रथा पर अहम फैसला: रामप्यारी को पति की पेंशन का हक मिला
 
राजस्थान हाईकोर्ट का नाता प्रथा पर अहम फैसला: रामप्यारी को पति की पेंशन का हक मिला

राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश में प्रचलित नाता प्रथा को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसने सामाजिक और कानूनी दोनों ही दृष्टियों से चर्चा का विषय बना दिया है। कोटा की निवासी रामप्यारी को पति की मृत्यु के बाद पेंशन का हकदार मानते हुए कोर्ट ने उन्हें पेंशन देने के आदेश जारी किए हैं।

रामप्यारी नाता प्रथा के तहत पत्नी बनी थीं। इसके कारण उनके पेंशन के अधिकार को लेकर प्रशासन में विवाद उत्पन्न हो गया था। पेंशन विभाग ने प्रारंभिक रूप से उनकी पेंशन की मांग को अस्वीकार कर दिया था, क्योंकि नाता प्रथा के तहत बनी महिलाओं को कानूनी मान्यता देने को लेकर स्पष्ट नीति नहीं थी।

हालांकि रामप्यारी ने कानूनी लड़ाई लड़ी और मामले को राजस्थान हाईकोर्ट तक पहुंचाया। कोर्ट ने सभी दस्तावेजों और प्रमाणों की समीक्षा के बाद यह स्पष्ट किया कि नाता प्रथा के तहत पति की पत्नी बनी महिला को पति की पेंशन का अधिकार है।

हाईकोर्ट के फैसले में कहा गया कि समाज में प्रचलित प्रथाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, और इन प्रथाओं के तहत बनी महिलाओं के आर्थिक अधिकारों को सुरक्षित रखना भी कानून का उद्देश्य है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पति की मृत्यु के बाद नाता प्रथा के तहत पत्नी बनी महिला को पेंशन और अन्य लाभ दिए जाने चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला राजस्थान में नाता प्रथा के तहत पत्नी बनने वाली महिलाओं के लिए नजीर साबित हो सकता है। इससे न केवल रामप्यारी को न्याय मिला है, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों में भी महिलाओं के अधिकारों की रक्षा का मार्ग प्रशस्त होगा।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे समाज में न्याय और समानता की भावना और मजबूत होगी।

राजस्थान के पेंशन विभाग ने भी कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए रामप्यारी को पेंशन जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में इस तरह के मामलों में पूर्व निर्धारित दिशा-निर्देश के अनुसार ही पेंशन और लाभ प्रदान किए जाएंगे।

इस फैसले से यह भी स्पष्ट हुआ कि कानून और समाज की प्रथाओं के बीच संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सामाजिक प्रथाओं का सम्मान करते हुए भी कानूनी अधिकारों की रक्षा की जाएगी।

राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का कहना है कि यह फैसला राजस्थान में महिलाओं के अधिकारों के लिए मिसाल बनेगा और नाता प्रथा के तहत बनी महिलाओं को सुरक्षित आर्थिक भविष्य का भरोसा देगा।

इस प्रकार, राजस्थान हाईकोर्ट का यह फैसला न केवल रामप्यारी के लिए न्याय का प्रतीक है, बल्कि पूरे राज्य में नाता प्रथा और महिलाओं के पेंशन अधिकारों के मामले में मार्गदर्शक साबित होगा।