राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: यौन अपराध मामलों में पीड़िता के फोटो-वीडियो सीलबंद लिफाफे में ही पेश होंगे
राजस्थान हाईकोर्ट ने यौन अपराधों से जुड़े मामलों को लेकर एक महत्वपूर्ण और रिपोर्टेबल जजमेंट दिया है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ऐसे मामलों में पीड़िता की निजी या अश्लील फोटो-वीडियो केवल सीलबंद लिफाफे या पासकोड लॉक इलेक्ट्रॉनिक फोल्डर में ही अदालत के समक्ष पेश किए जाएंगे।हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह की संवेदनशील सामग्री के लीक होने या वायरल होने की आशंका बनी रहती है, जिससे पीड़िता के वर्तमान और भविष्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी महिला की निजी तस्वीरें या वीडियो सार्वजनिक होना उसके सामाजिक और वैवाहिक जीवन को पूरी तरह तबाह कर सकता है।
कोर्ट ने यह भी माना कि ऐसी सामग्री को खुले तौर पर पेश करना महिलाओं की गरिमा और निजता के अधिकार का उल्लंघन है। अदालत ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान भी पीड़िता की पहचान और सम्मान की रक्षा करना बेहद जरूरी है।इस फैसले को महिलाओं की गोपनीयता और सम्मान की सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इससे संवेदनशील मामलों में डिजिटल सबूतों के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलेंगे।
अदालत ने यह भी संकेत दिया कि जांच एजेंसियों और संबंधित पक्षों को ऐसे मामलों में अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी, ताकि किसी भी तरह से पीड़िता की पहचान उजागर न हो। विशेषज्ञों के अनुसार सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दौर में निजी फोटो और वीडियो के वायरल होने का खतरा पहले से ज्यादा बढ़ गया है। ऐसे में हाईकोर्ट का यह फैसला पीड़ित महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए अहम माना जा रहा है।
