खेजड़ी संरक्षण पर राजस्थान हाईकोर्ट की सख्ती, बिना अनुमति पेड़ कटाई पर रोक के निर्देश
राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने खेजड़ी (Prosopis cineraria) पेड़ों की कटाई पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि बिना पूर्व अनुमति के किसी भी पेड़ की कटाई नहीं की जानी चाहिए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने ऐतिहासिक खेजड़ली आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह घटना पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल है, जिसे आज भी प्रेरणा के रूप में देखा जाता है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि शासकों और प्रशासन को पर्यावरण की सुरक्षा के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
अदालत ने यह भी चिंता जताई कि सोलर प्रोजेक्ट और विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर हरियाली को नुकसान पहुंच रहा है, जो दीर्घकालिक रूप से पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।
खेजड़ी को राजस्थान का राज्य वृक्ष माना जाता है और यह रेगिस्तानी क्षेत्रों में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके संरक्षण को लेकर पहले भी कई बार मांग उठती रही है।
हाईकोर्ट ने संबंधित विभागों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि किसी भी विकास परियोजना में पर्यावरणीय नियमों और पेड़ संरक्षण मानकों का सख्ती से पालन किया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय न केवल खेजड़ी संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह राज्य में पर्यावरणीय संतुलन और सतत विकास की दिशा में भी एक मजबूत संदेश देता है।
