राजस्थान हाईकोर्ट ने खनन पट्टों पर दिया अहम फैसला, 93 लीजें रद्द, लीजधारकों को अमानत राशि लौटाने के निर्देश
राजस्थान में खनन को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गहमा-गहमी के बीच राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने प्रदेश में जारी 93 खनन पट्टों (लीजों) को रद्द करने का आदेश दिया है। यह फैसला खनन पट्टों से जुड़ी अवैधता और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन को लेकर आया है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि खनन पट्टों के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन अनिवार्य है। कोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी आदेश दिया कि सभी लीज धारियों को उनकी जमा अमानत राशि लौटाई जाए, ताकि खनन पट्टों के रद्द होने से किसी भी लीज धारक को अनावश्यक आर्थिक हानि न हो।
राजस्थान में खनन पट्टों को लेकर पिछले कुछ समय से सियासी और कानूनी विवाद चल रहा था। कई मामलों में लीज जारी करने में अनियमितताएं सामने आई थीं। इन अनियमितताओं के चलते कई खनन पट्टे कानूनी रूप से चुनौती के तहत थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और नियमों के पालन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे यह संदेश गया कि राज्य में खनन संचालन और पट्टे जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप होनी चाहिए।
राज्य सरकार ने कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए लीजधारकों को राशि लौटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार के अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में खनन पट्टे जारी करने में पूरी पारदर्शिता और मानक प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद खनन क्षेत्र में कार्यरत कंपनियों और उद्योगपतियों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली है। कुछ ने फैसले का स्वागत किया और कहा कि इससे खनन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, जबकि कुछ ने चिंता जताई कि इससे खनन उद्योग की योजनाओं पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, खनन पट्टों की नियमित समीक्षा और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन यह सुनिश्चित करता है कि खनन गतिविधियाँ पर्यावरण और कानून के अनुरूप हों। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि खनन पट्टे जारी करने में किसी भी अवैध या अनियमित कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राजस्थान में खनन पट्टों को लेकर यह फैसला न केवल कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीर संदेश देता है। इससे यह संकेत गया कि सरकार और खनन उद्योग को नियमों और पारदर्शिता के दायरे में रहना होगा।
इस प्रकार, राजस्थान हाईकोर्ट ने खनन पट्टों की प्रक्रिया और लीजधारकों के अधिकारों को सुनिश्चित करते हुए 93 पट्टों को रद्द किया और राज्य सरकार को अमानत राशि लौटाने के आदेश दिए। यह फैसला राज्य में खनन क्षेत्र में पारदर्शिता, नियमों का पालन और न्यायसंगत कार्यवाही के लिए मिसाल माना जा रहा है।
