Aapka Rajasthan

राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला: 'दो बच्चों के नियम' को समाप्त किया

राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला: 'दो बच्चों के नियम' को समाप्त किया
 
राजस्थान सरकार का बड़ा फैसला: 'दो बच्चों के नियम' को समाप्त किया

राजस्थान की भजनलाल सरकार ने प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव करते हुए स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों में चुनाव लड़ने के लिए दशकों पुराने 'दो बच्चों के नियम' को समाप्त करने की मंजूरी दे दी है। बुधवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।

अब तक राजस्थान में स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों में चुनाव लड़ने के लिए 'दो बच्चों के नियम' को अनिवार्य किया गया था। इसका मतलब यह था कि उम्मीदवारों के पास केवल दो बच्चे होने चाहिए, और अगर किसी उम्मीदवार के तीन या उससे ज्यादा बच्चे होते, तो वह चुनाव नहीं लड़ सकते थे। यह नियम कई दशकों से लागू था और इसे लेकर विवाद भी रहे थे।

राज्य सरकार का यह फैसला राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह नियम सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से कई लोगों के लिए कठिनाइयां उत्पन्न करता था। कई गांवों और क्षेत्रों में यह नियम स्थानीय नेताओं के लिए समस्याएं पैदा कर रहा था, खासकर उन परिवारों के लिए जिनके तीन या उससे अधिक बच्चे थे।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस फैसले को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सुधार के रूप में प्रस्तुत किया है। उनका कहना है कि यह निर्णय चुनावों में अधिक भागीदारी को बढ़ावा देगा और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच समानता सुनिश्चित करेगा।

सरकार का यह कदम यह भी दिखाता है कि वह स्थानीय स्तर पर लोगों की अधिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए तैयार है और इस फैसले से यह संभावना जताई जा रही है कि भविष्य में स्थानीय निकाय चुनावों में अधिक उम्मीदवार मैदान में उतर सकते हैं।

इस फैसले के बाद प्रदेश में राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है और इस पर विभिन्न नेताओं के प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं। कुछ नेताओं का मानना है कि यह कदम चुनावों में समानता और निष्पक्षता को बढ़ावा देगा, जबकि कुछ का कहना है कि यह कदम चुनावी प्रक्रिया में अनावश्यक जटिलता भी ला सकता है।

राजस्थान सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि आगामी स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों में अब इस नियम को लागू नहीं किया जाएगा, जिससे उन उम्मीदवारों के लिए दरवाजे खोल दिए गए हैं, जो पहले इस नियम के कारण चुनाव नहीं लड़ सकते थे।