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राजस्थान निकाय चुनाव: पांच नगर निगमों में किसी को बहुमत नहीं, बोर्ड बनाने के लिए जोड़तोड़ शुरू

राजस्थान निकाय चुनाव: पांच नगर निगमों में किसी को बहुमत नहीं, बोर्ड बनाने के लिए जोड़तोड़ शुरू
 
राजस्थान निकाय चुनाव: पांच नगर निगमों में किसी को बहुमत नहीं, बोर्ड बनाने के लिए जोड़तोड़ शुरू

राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद कई नगर निगमों में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है। चुनाव परिणामों ने राजनीतिक दलों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। जोधपुर, अजमेर, भरतपुर, अलवर और पाली नगर निगम में किसी भी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में इन निकायों में बोर्ड गठन के लिए राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलने की संभावना है।

नतीजों के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन पांचों नगर निगमों में महापौर की कुर्सी किसके हिस्से आएगी और बोर्ड बनाने के लिए कौन सा दल किसके साथ जाएगा। स्पष्ट बहुमत नहीं होने के कारण निर्दलीय और छोटे दलों से जुड़े पार्षदों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। राजनीतिक दल अब ऐसे पार्षदों के समर्थन को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर सकते हैं।

जोधपुर नगर निगम में भी किसी एक दल को बहुमत नहीं मिलने से बोर्ड गठन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। चुनाव से पहले दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच कड़ी टक्कर मानी जा रही थी। अब परिणामों के बाद बहुमत का आंकड़ा जुटाना दोनों के लिए चुनौती बन गया है। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों का समर्थन सत्ता की चाबी बन सकता है।

अजमेर और भरतपुर नगर निगम के परिणामों ने भी राजनीतिक दलों की रणनीति को प्रभावित किया है। दोनों जगह किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण पार्षदों की भूमिका बढ़ गई है। महापौर और बोर्ड गठन के लिए आवश्यक संख्या जुटाने के लिए पार्टियों को अपने मौजूदा पार्षदों के साथ-साथ दूसरे खेमे के पार्षदों से भी बातचीत करनी पड़ सकती है।

अलवर और पाली नगर निगम में भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। यहां चुनाव परिणाम आने के बाद अब सभी की नजर बोर्ड गठन की प्रक्रिया पर है। राजनीतिक दल बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए संभावित सहयोगियों की तलाश कर सकते हैं। निर्दलीय पार्षदों के अलावा छोटे दलों के निर्वाचित प्रतिनिधि भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

निकाय चुनावों में स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में अक्सर राजनीतिक दलों के बीच बातचीत और समर्थन जुटाने का दौर शुरू होता है। ऐसे में आने वाले दिनों में कई नए राजनीतिक समीकरण देखने को मिल सकते हैं। पार्षदों के समर्थन के बदले बोर्ड में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों और समितियों में प्रतिनिधित्व को लेकर भी बातचीत होने की संभावना रहती है।

राजस्थान के इन पांच नगर निगमों के परिणाम इसलिए भी अहम माने जा रहे हैं क्योंकि नगर निकायों में बोर्ड का गठन स्थानीय स्तर पर विकास और प्रशासन से जुड़े फैसलों को सीधे प्रभावित करता है। महापौर के साथ बोर्ड में बहुमत रखने वाला राजनीतिक दल शहर की विकास योजनाओं और स्थानीय प्रशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों में प्रभावी भूमिका निभाता है।

अब जोधपुर, अजमेर, भरतपुर, अलवर और पाली में राजनीतिक दलों की अगली रणनीति पर सबकी नजर रहेगी। किस दल को निर्दलीयों और अन्य पार्षदों का समर्थन मिलता है और कौन बहुमत का आंकड़ा जुटाने में सफल रहता है, इससे ही इन नगर निगमों में नए बोर्ड की तस्वीर साफ होगी। फिलहाल पांचों निकायों में परिणाम के बाद भी राजनीतिक गतिविधियां जारी हैं और बोर्ड गठन को लेकर सस्पेंस बना हुआ है।