राजस्थान निकाय चुनाव: 32 निकायों में निर्विरोध मेयर-चेयरमैन चुने गए, वीडियो में जाने BJP के 29 निकायों में प्रमुख
राजस्थान में नगर निकाय चुनाव की प्रक्रिया के बीच 2 नगर निगम समेत 32 निकायों में मेयर और चेयरमैन का चुनाव निर्विरोध हो गया है। भरतपुर और भीलवाड़ा नगर निगम समेत 29 निकायों में बीजेपी के प्रत्याशी निर्विरोध प्रमुख चुने गए हैं। कांग्रेस को दो निकायों में निर्विरोध जीत मिली है।वहीं धौलपुर नगर परिषद में एक अनोखा मामला सामने आया। यहां पार्षद का चुनाव लड़े बिना निर्दलीय गिरीश गर्ग निर्विरोध चेयरमैन चुने गए। इसी तरह धोरीमन्ना नगर पालिका में बीजेपी की 21 साल 47 दिन की कीर्ति गोसाईवाल निर्विरोध पालिकाध्यक्ष निर्वाचित हुई हैं। वह राज्य में सबसे कम उम्र के निर्विरोध निर्वाचित पालिकाध्यक्षों में शामिल हो गई हैं।
21 सितंबर को 273 निकायों में चुनाव
राजस्थान के सात नगर निगम समेत 305 निकायों में शुक्रवार को नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख थी। नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कई निकायों में मुकाबले की तस्वीर साफ हो गई है।अब 21 सितंबर को प्रदेश के 273 निकायों में मेयर और चेयरमैन के चुनाव होंगे। जहां निर्विरोध निर्वाचन हो चुका है, वहां मतदान की जरूरत नहीं होगी। बाकी निकायों में पार्षद अपने-अपने प्रमुख के लिए मतदान करेंगे।
बहरोड़ में विधायक और ASP के बीच बहस
बहरोड़ के कचहरी परिसर में शुक्रवार को बर्डोद नगर पालिका के दो पार्षदों के शपथ ग्रहण कार्यक्रम के दौरान विवाद की स्थिति बन गई। यहां मुंडावर से कांग्रेस विधायक ललित यादव और ASP सुरेश खींची के बीच बहस हो गई।बताया गया कि विधायक दोनों पार्षदों को अपने साथ लेकर जाने लगे थे। इसी दौरान ASP सुरेश खींची विधायक की गाड़ी के सामने खड़े हो गए। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहस बढ़ गई।मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच भी धक्का-मुक्की हुई। घटना के बाद कुछ समय के लिए कचहरी परिसर में तनाव का माहौल रहा।
निर्विरोध चुनाव से कई निकायों में मुकाबला खत्म
नामांकन वापसी के बाद 32 निकायों में मेयर और चेयरमैन का निर्वाचन निर्विरोध हो गया है। इनमें बीजेपी के प्रत्याशियों की संख्या सबसे अधिक है। भरतपुर और भीलवाड़ा नगर निगम में भी बीजेपी के प्रमुख निर्विरोध चुने गए हैं।अब 21 सितंबर को होने वाले चुनावों पर सभी की नजर है। 273 निकायों में मतदान के बाद मेयर और चेयरमैन के पदों पर निर्वाचित प्रतिनिधियों की स्थिति स्पष्ट हो
