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परिवहन निरीक्षक संघ अध्यक्ष के काफिले पर उठे सवाल, वीडियो में देंखे विभागीय गाड़ियों के इस्तेमाल को लेकर विवाद

परिवहन निरीक्षक संघ अध्यक्ष के काफिले पर उठे सवाल, वीडियो में देंखे विभागीय गाड़ियों के इस्तेमाल को लेकर विवाद
 
परिवहन निरीक्षक संघ अध्यक्ष के काफिले पर उठे सवाल, वीडियो में देंखे विभागीय गाड़ियों के इस्तेमाल को लेकर विवाद

राजस्थान में एक ओर राज्य सरकार पेट्रोल-डीजल की बचत और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के उपयोग पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर परिवहन विभाग से जुड़ा एक मामला चर्चा में आ गया है। परिवहन निरीक्षक संघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष रॉबिन सिंह के स्वागत और विजय जुलूस को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जीत के बाद निकाला गया काफिला

जानकारी के अनुसार, परिवहन निरीक्षक संघ के अध्यक्ष चुने जाने के बाद रॉबिन सिंह ने अपने गृह जिले झुंझुनूं के गांव में समर्थकों के साथ विजय काफिला निकाला। इस दौरान कई वाहन उनके साथ चलते दिखाई दिए और स्थानीय स्तर पर उनका स्वागत किया गया।बताया जा रहा है कि काफिले में सात से आठ गाड़ियां शामिल थीं, जिनके साथ समर्थक भी मौजूद थे।

विभागीय गाड़ियों के इस्तेमाल पर विवाद

विवाद तब खड़ा हुआ जब काफिले में परिवहन विभाग की फ्लाइंग गाड़ी के एस्कॉर्ट करने की बात सामने आई। आरोप है कि विभागीय वाहन निजी और गैर-सरकारी कार्यक्रम में उपयोग किए गए।इस मुद्दे को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है कि क्या सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल नियमों के अनुरूप किया गया था या नहीं।

सनरूफ से अभिवादन करते दिखे रॉबिन सिंह

काफिले के दौरान रॉबिन सिंह चलती कार के सनरूफ से बाहर निकलकर लोगों का अभिवादन करते नजर आए। इस दौरान समर्थकों ने उनका स्वागत किया और जगह-जगह उनका अभिनंदन किया गया।हालांकि, सड़क सुरक्षा नियमों के संदर्भ में भी इस तरह की गतिविधियों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

सरकार के संदेश और जमीनी तस्वीर पर बहस

राज्य सरकार लगातार ईंधन की बचत, प्रदूषण नियंत्रण और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कर रही है। मुख्यमंत्री से लेकर कई मंत्री भी सार्वजनिक रूप से ईवी वाहनों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित कर चुके हैं।ऐसे में सरकारी विभाग से जुड़े पदाधिकारी के विजय जुलूस में कई वाहनों और कथित तौर पर विभागीय गाड़ियों के इस्तेमाल को लेकर विपक्ष और आम लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है।

आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल इस मामले में परिवहन विभाग या राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि विभागीय वाहनों के उपयोग को लेकर शिकायत या जांच होती है, तो तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।मामला सामने आने के बाद अब सभी की नजर इस पर है कि प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम को किस तरह देखता है और क्या कोई जांच या स्पष्टीकरण जारी किया जाता है।