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राजस्थान यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती पर उठे सवाल, इंटरव्यू में मनमाने नंबर देने के आरोप

 
राजस्थान यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती पर उठे सवाल, इंटरव्यू में मनमाने नंबर देने के आरोप

राजस्थान यूनिवर्सिटी में साल 2011-12 और 2013-14 के दौरान हुई 294 सहायक आचार्य (असिस्टेंट प्रोफेसर) भर्ती एक बार फिर विवादों में आ गई है। भर्ती प्रक्रिया में इंटरव्यू के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि चयन समिति ने अपने चहेते अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में बेहद ज्यादा अंक देकर चयनित कराया, जबकि योग्य उम्मीदवारों को बेहद कम नंबर देकर बाहर कर दिया गया।

जानकारी के मुताबिक भर्ती प्रक्रिया के दस्तावेजों में यह बात सामने आई है कि कई योग्य अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में 50 में से केवल 10 अंक दिए गए, जबकि कुछ पसंदीदा उम्मीदवारों को 49 तक अंक प्रदान किए गए। इस खुलासे के बाद पूरी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि भर्ती के दौरान इंटरव्यू के अंक चयन में निर्णायक भूमिका निभा रहे थे। ऐसे में इंटरव्यू बोर्ड द्वारा मनमाने तरीके से अंक देने से कई मेरिटधारी उम्मीदवार चयन सूची से बाहर हो गए। अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और प्रभावशाली लोगों के दबाव में चयन किया गया।

इस मामले को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है और कई अभ्यर्थी अदालत का दरवाजा भी खटखटा चुके हैं। अब नए दस्तावेज सामने आने के बाद मामला फिर चर्चा में आ गया है। भर्ती प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड में इंटरव्यू अंक वितरण के पैटर्न को देखकर कई लोग हैरानी जता रहे हैं।

शिक्षा जगत से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि विश्वविद्यालयों में होने वाली भर्तियों में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे शिक्षा की गुणवत्ता सीधे प्रभावित होती है। यदि योग्य उम्मीदवारों की जगह पक्षपात के आधार पर चयन होता है तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों की शिक्षा पर भी पड़ता है।

वहीं इस पूरे मामले पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि विवाद बढ़ने के बाद मामले की जांच और भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा की मांग तेज हो गई है।

राजस्थान यूनिवर्सिटी की यह भर्ती पहले भी कई बार विवादों में रह चुकी है, लेकिन अब इंटरव्यू में दिए गए अंकों को लेकर सामने आई जानकारी ने मामले को और गंभीर बना दिया है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।