कोटा RTU में 2 हजार स्टूडेंट की सुरक्षा पर सवाल, डेढ़ किमी जंगली रास्ते से गुजरने की मजबूरी; सांप-गोह दिखने का दावा
राजस्थान के कोटा स्थित राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी (RTU) में करीब 2 हजार विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, विद्यार्थियों को आने-जाने के लिए करीब डेढ़ किलोमीटर लंबे जंगली रास्ते से पैदल गुजरना पड़ता है। इस रास्ते पर आए दिन सांप और गोह दिखाई देने की बात कही जा रही है। इसके अलावा, विश्वविद्यालय परिसर की डिस्पेंसरी केवल पांच घंटे खुलने का मुद्दा भी सामने आया है। इन परिस्थितियों के चलते विद्यार्थियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
डेढ़ किलोमीटर के जंगली रास्ते से गुजरते हैं विद्यार्थी
बताया जा रहा है कि RTU के विद्यार्थियों को आने-जाने के दौरान लगभग डेढ़ किलोमीटर का रास्ता पैदल तय करना पड़ता है। रास्ते के आसपास झाड़ियां और जंगली क्षेत्र होने के कारण विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर सुबह जल्दी या शाम के समय इस रास्ते से गुजरना विद्यार्थियों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिहाज से रास्ते की स्थिति, पर्याप्त रोशनी और नियमित निगरानी महत्वपूर्ण है। यदि रास्ते पर जहरीले जीव-जंतुओं की आवाजाही रहती है, तो संबंधित प्रशासन के लिए आवश्यक सुरक्षा इंतजाम करना जरूरी हो जाता है।
सांप और गोह दिखाई देने की शिकायत
विद्यार्थियों से जुड़ी जानकारी में रास्ते पर सांप और गोह दिखाई देने का मुद्दा भी उठाया गया है। ऐसे जीव-जंतुओं की मौजूदगी से विद्यार्थियों में डर का माहौल बन सकता है। हालांकि, इन घटनाओं की संख्या और स्थान के बारे में विस्तृत आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
ऐसी स्थिति में रास्ते के आसपास उगी झाड़ियों की नियमित सफाई, पर्याप्त रोशनी, सुरक्षित पैदल मार्ग और जरूरत पड़ने पर वन्यजीव विशेषज्ञों की सहायता जैसे उपाय उपयोगी हो सकते हैं। किसी भी जीव को नुकसान पहुंचाने के बजाय सुरक्षित तरीके से उसे हटाने की व्यवस्था की जानी चाहिए।
पांच घंटे ही खुलती है डिस्पेंसरी
विश्वविद्यालय की डिस्पेंसरी के सीमित समय तक खुलने का मुद्दा भी विद्यार्थियों की चिंता से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, डिस्पेंसरी केवल पांच घंटे खुलती है। यदि विद्यार्थियों को इसके अलावा किसी समय स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होती है, तो उन्हें वैकल्पिक चिकित्सा सुविधा की जरूरत पड़ सकती है।
विश्वविद्यालय परिसर में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए प्राथमिक उपचार की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। खासकर सांप के काटने, चोट लगने या अचानक तबीयत बिगड़ने जैसी आपात स्थितियों में समय पर चिकित्सा सहायता मिलना जरूरी है। ऐसे मामलों में नजदीकी अस्पताल तक पहुंचने की व्यवस्था और आपातकालीन संपर्क नंबरों की जानकारी भी उपयोगी साबित हो सकती है।
विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम
विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को रास्ते की स्थिति का निरीक्षण कराना चाहिए। जरूरत के अनुसार झाड़ियों की सफाई, लाइट लगाने, पैदल मार्ग को सुरक्षित बनाने और नियमित निगरानी की व्यवस्था की जा सकती है। साथ ही, डिस्पेंसरी के समय और आपातकालीन चिकित्सा सहायता की उपलब्धता की समीक्षा भी जरूरी है।
प्रशासन की व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
करीब 2 हजार विद्यार्थियों से जुड़ा यह मामला परिसर की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की अहमियत को सामने लाता है। जंगली रास्ते से गुजरने की मजबूरी, सांप और गोह दिखाई देने की शिकायतें तथा डिस्पेंसरी के सीमित समय को लेकर विद्यार्थियों की चिंताओं पर ध्यान देना जरूरी है।
हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन का आधिकारिक पक्ष और सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित विस्तृत जानकारी सामने आने पर ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाना और उनकी शिकायतों का समाधान करना इस मामले में महत्वपूर्ण रहेगा।
