राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर 'प्रचंड' में भरी उड़ान, वीडियो में जाने बनीं देश की पहली राष्ट्रपति
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए जैसलमेर एयरफोर्स स्टेशन से स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर (LCH) 'प्रचंड' में उड़ान भरी। इस उड़ान के साथ ही राष्ट्रपति मुर्मू देश की पहली राष्ट्रपति बन गईं, जिन्होंने हेलिकॉप्टर 'प्रचंड' में बतौर को-पायलट उड़ान भरी। उनके साथ ग्रुप कैप्टन एन.एस. बहुआ हेलिकॉप्टर के पायलट थे।
स्वदेशी हेलिकॉप्टर 'प्रचंड' में उड़ान का महत्व
स्वदेशी हेलिकॉप्टर 'प्रचंड' को भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है और यह भारतीय वायुसेना के लिए एक महत्वपूर्ण और मजबूती प्रदान करने वाला हेलिकॉप्टर है। हेलिकॉप्टर 'प्रचंड' को खासतौर पर दुश्मन के इलाके में हल्की और तेज गति से हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह हेलिकॉप्टर भारतीय वायुसेना की ताकत को और अधिक सशक्त बनाने के लिए विकसित किया गया है।
राष्ट्रपति मुर्मू का इस हेलिकॉप्टर में उड़ान भरना न केवल भारतीय सैन्य क्षमता का प्रतीक है, बल्कि यह भारत के आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। राष्ट्रपति ने उड़ान के दौरान हेलिकॉप्टर के कॉकपिट से सैल्यूट किया, जो भारतीय सेना और वायुसेना के प्रति उनके सम्मान का प्रतीक था।
पहले भी विमान में उड़ान भर चुकी हैं राष्ट्रपति मुर्मू
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इससे पहले भी भारतीय लड़ाकू विमानों में उड़ान भरने का रिकॉर्ड बना चुकी हैं। वे देश की पहली राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने लड़ाकू विमान सुखोई और राफेल में उड़ान भरी थी। यह उनके साहस और वायुसेना के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है, साथ ही यह भी साबित करता है कि वे भारतीय सुरक्षा बलों के मामलों में गहरी रुचि रखती हैं।
जैसलमेर वायुसेना स्टेशन का दौरा
राष्ट्रपति मुर्मू सुबह करीब सवा 9 बजे जैसलमेर वायुसेना स्टेशन पहुंचीं। यहां उन्हें वायुसेना के अधिकारियों द्वारा स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर 'प्रचंड' के बारे में ब्रीफिंग दी गई। इसके बाद उन्होंने हेलिकॉप्टर के कॉकपिट में बैठकर उड़ान भरी। सुबह करीब सवा 10 बजे हेलिकॉप्टर ने उड़ान भरी और राष्ट्रपति ने इस महत्वपूर्ण मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
राष्ट्रपति की उड़ान का राष्ट्रीय महत्व
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की इस उड़ान का राष्ट्रीय महत्व है, क्योंकि यह भारतीय रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा देने का संकेत है। भारतीय सेना और वायुसेना की तैयारियों और उनकी सशक्तता को दर्शाता है, और यह दर्शाता है कि भारत अब अपने रक्षा उपकरणों के मामले में पूरी तरह से आत्मनिर्भर बन चुका है।
इस ऐतिहासिक घटना के बाद, यह साफ है कि राष्ट्रपति मुर्मू न केवल अपनी नेतृत्व क्षमता के लिए पहचानी जाती हैं, बल्कि भारतीय सेना और वायुसेना के प्रति उनका अपार सम्मान और विश्वास भी दर्शाती हैं।
