राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में बदलाव की तैयारी अंतिम चरण में, कर्मचारियों और पेंशनर्स की चिंता बढ़ी
राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) को लेकर राज्य सरकार द्वारा इंश्योरेंस मॉडल में परिवर्तन करने की तैयारी अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। इस प्रस्तावित बदलाव को लेकर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच असमंजस और असंतोष का माहौल देखा जा रहा है, खासकर भरतपुर क्षेत्र में।
भरतपुर सहित कई जिलों के सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स लंबे समय से इस सवाल का जवाब मांग रहे हैं कि मौजूदा स्थिति में “RGHS कब शुरू होगी?” और नई व्यवस्था के तहत इलाज और कैशलेस सुविधाओं का लाभ कब से सुचारू रूप से मिल पाएगा।
सूत्रों के अनुसार, सरकार स्वास्थ्य बीमा आधारित मॉडल को लागू करने पर विचार कर रही है, जिसमें मौजूदा प्रतिपूर्ति (reimbursement) प्रणाली की जगह इंश्योरेंस आधारित कैशलेस इलाज व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इस बदलाव का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना बताया जा रहा है।
हालांकि, इस प्रक्रिया में देरी और स्पष्ट दिशा-निर्देशों की कमी के कारण कर्मचारियों और पेंशनर्स को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई लोगों का कहना है कि अस्पतालों में इलाज को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और कई जगहों पर कैशलेस सुविधा को लेकर असमंजस की स्थिति देखी जा रही है।
भरतपुर के सरकारी कर्मचारी संगठनों ने आरोप लगाया है कि योजना के क्रियान्वयन में लगातार देरी से सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके परिवारों को आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधा में अनिश्चितता स्वीकार्य नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नई प्रणाली को लागू करने से पहले तकनीकी और प्रशासनिक तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की बाधा न आए। अधिकारियों के अनुसार, बदलाव का उद्देश्य व्यवस्था को अधिक स्थिर और डिजिटल बनाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इंश्योरेंस मॉडल लागू होने से यदि सही ढंग से क्रियान्वयन किया गया तो लाभार्थियों को बेहतर और तेज चिकित्सा सेवाएं मिल सकती हैं। हालांकि, इसके लिए अस्पताल नेटवर्क, क्लेम प्रोसेसिंग और भुगतान प्रणाली को मजबूत करना बेहद जरूरी होगा।
इस बीच, कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच लगातार यह मांग उठ रही है कि सरकार जल्द से जल्द स्पष्ट तारीख जारी करे ताकि अनिश्चितता समाप्त हो सके। सोशल मीडिया और संगठनात्मक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
