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राजस्थान पंचायत चुनाव पर सियासत तेज, तारीख को लेकर असमंजस बरकरार

 
राजस्थान पंचायत चुनाव पर सियासत तेज, तारीख को लेकर असमंजस बरकरार

राजस्थान में पंचायत चुनाव कब होंगे, इसे लेकर प्रदेश में सियासी माहौल गरमाया हुआ है। अभी तक चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं होने से जहां आम जनता में सवाल उठ रहे हैं, वहीं राजनीतिक दल भी इस मुद्दे पर आमने-सामने आ गए हैं। विपक्ष लगातार चुनाव में हो रही देरी को लेकर सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग पर निशाना साध रहा है।

मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि राज्य निर्वाचन आयोग सरकार के इशारे पर काम कर रहा है और जानबूझकर पंचायत चुनाव टाले जा रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सरकार चुनाव से बचना चाहती है, क्योंकि उसे जनता के बीच अपने प्रदर्शन को लेकर भरोसा नहीं है।

दूसरी ओर, इस पूरे विवाद में एक नया मोड़ तब आया जब राज्य के पूर्व चुनाव आयुक्त ने भी चुनाव में देरी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव समय पर होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा है और इसमें अनावश्यक देरी लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

सूत्रों के अनुसार, राज्य में पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है या खत्म होने के करीब है, ऐसे में चुनाव कराना संवैधानिक रूप से जरूरी माना जाता है। लेकिन अब तक चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं होने से स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है।

राज्य सरकार की ओर से हालांकि इस मामले पर सफाई दी गई है। सरकार का कहना है कि चुनाव की तैयारियां चल रही हैं और उचित समय पर तारीखों का ऐलान किया जाएगा। साथ ही प्रशासनिक और तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए कहा जा रहा है कि पूरी तैयारी के बाद ही चुनाव कराए जाएंगे, ताकि प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न हो सके।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंचायत चुनाव केवल स्थानीय स्तर की प्रक्रिया नहीं होते, बल्कि इनका असर प्रदेश की राजनीति पर भी पड़ता है। यही कारण है कि सभी दल इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहे हैं और अपने-अपने तरीके से इसे भुना रहे हैं।

फिलहाल, राजस्थान में पंचायत चुनाव की तारीख को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। जनता और राजनीतिक दल दोनों ही राज्य निर्वाचन आयोग के आधिकारिक ऐलान का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव कब घोषित होते हैं और यह सियासी घमासान किस दिशा में जाता है।