राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनाव पर सियासत तेज, मंत्री झाबर सिंह खर्रा बोले- सरकार तैयार, वीडियो में जाने अब फैसला निर्वाचन आयोग और OBC आयोग के हाथ में
राजस्थान में लंबे समय से लंबित नगरीय निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राज्य सरकार और विपक्ष के बीच चुनाव में देरी को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस बीच स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार चुनाव कराने से जुड़ी सभी प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर चुकी है और अब चुनाव कार्यक्रम घोषित करना राज्य निर्वाचन आयोग तथा अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग की संवैधानिक प्रक्रिया पर निर्भर करता है।
मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि सरकार की ओर से आवश्यक प्रशासनिक कार्य पूरे किए जा चुके हैं। अब निर्वाचन की तारीखों का ऐलान करना राज्य निर्वाचन आयोग का अधिकार क्षेत्र है। साथ ही, OBC आरक्षण से जुड़े मामलों में आयोग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई संभव होगी।
कांग्रेस पर लगाया दोहरी नीति का आरोप
झाबर सिंह खर्रा ने इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि विपक्ष दोहरी राजनीति कर रहा है। उनके अनुसार, कांग्रेस एक तरफ चुनाव में देरी का मुद्दा उठाकर सरकार पर सवाल खड़े कर रही है, जबकि दूसरी ओर वह स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं में OBC राजनीतिक आरक्षण भी यथावत बनाए रखना चाहती है।उन्होंने कहा कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत OBC आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया पूरी किए बिना चुनाव कराना संभव नहीं है। ऐसे में सरकार सभी कानूनी और संवैधानिक पहलुओं का पालन कर रही है।
हाईकोर्ट ने दिए हैं 31 जुलाई तक चुनाव कराने के निर्देश
गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को 31 जुलाई तक नगरीय निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद अभी तक चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है।चुनाव की तारीखों में हो रही देरी को लेकर राजनीतिक हलकों में लगातार चर्चा बनी हुई है और विपक्ष सरकार पर चुनाव टालने का आरोप लगा रहा है।
कांग्रेस नेता ने दायर की अवमानना याचिका
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं होने पर कांग्रेस नेता संयम लोढ़ा ने अदालत में अवमानना याचिका दायर की है। इस याचिका में राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के संबंधित अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है।याचिका में आरोप लगाया गया है कि अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया गया और निर्धारित समयसीमा के बावजूद चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई।
निर्वाचन आयोग के फैसले पर टिकी निगाहें
राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनाव लंबे समय से लंबित हैं। ऐसे में लाखों मतदाताओं के साथ-साथ राजनीतिक दलों की नजर अब राज्य निर्वाचन आयोग के अगले कदम पर टिकी हुई हैयदि OBC आरक्षण से जुड़ी संवैधानिक प्रक्रिया समय पर पूरी हो जाती है, तो चुनाव कार्यक्रम जल्द घोषित किए जाने की संभावना जताई जा रही है। वहीं, अवमानना याचिका पर अदालत की सुनवाई भी इस पूरे मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
