राजस्थान में केंद्रीय फंड में कटौती पर सियासत गरम: टीकाराम जूली ने भजनलाल सरकार से मांगा जवाब
राजस्थान में केंद्र से मिलने वाले फंड में कमी को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार से जवाब मांगा है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र से मिलने वाली राशि में भारी कमी आई है, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
केंद्रीय फंड में कमी का आरोप
कांग्रेस के अनुसार, केंद्रीय करों के बंटवारे में राजस्थान को अपेक्षित राशि नहीं मिल पाई। पार्टी का दावा है कि जहां राज्य को लगभग 85,716 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान था, वहां करीब 83,940 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए। यानी हजारों करोड़ रुपये की कमी सामने आई है।
इसके अलावा ‘ग्रांट-इन-एड’ में भी कटौती का आरोप लगाया गया है। कांग्रेस का कहना है कि 39,193 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 37,910 करोड़ रुपये ही मिले। इससे राज्य के विकास कार्यों पर असर पड़ सकता है।
योजनाओं में 37% तक कटौती का दावा
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ योजनाओं में भारी कटौती की गई है। पार्टी के मुताबिक, एक प्रमुख योजना में जहां 15 हजार करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद थी, वहां सिर्फ करीब 9,500 करोड़ रुपये ही मिले, जो लगभग 37 प्रतिशत की कमी को दर्शाता है।
जूली बोले- बढ़ेगा आर्थिक दबाव
टीकाराम जूली ने कहा कि अलग-अलग मदों में कुल मिलाकर 8 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी सामने आ रही है। इससे राज्य पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा और विकास योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वित्त आयोग की सिफारिशों के चलते राज्य की हिस्सेदारी में भी कमी आई है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।
केंद्र और राज्य सरकार पर सवाल
जूली ने मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार दावा करती है कि केंद्र से लाभ लेकर आती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि राज्य को उसका पूरा हक नहीं मिल रहा। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह स्पष्ट करे कि आखिर राजस्थान को अपेक्षित फंड क्यों नहीं मिल पा रहा।
कर्ज और आर्थिक स्थिति पर भी चिंता
नेता प्रतिपक्ष ने राज्य के बढ़ते कर्ज को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार तेजी से कर्ज ले रही है, जिससे भविष्य में आर्थिक संकट गहरा सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था के आकार में गिरावट चिंताजनक संकेत है।
सियासी तकरार बढ़ी
केंद्रीय फंड में कटौती के आरोपों के बाद राजस्थान की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। विपक्ष जहां सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहा है, वहीं आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ने की संभावना है।
