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रसोई गैस को लेकर राजस्थान में सियासी बवाल, कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने

रसोई गैस को लेकर राजस्थान में सियासी बवाल, कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने
 
रसोई गैस को लेकर राजस्थान में सियासी बवाल, कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने

राजस्थान में रसोई गैस (एलपीजी) संकट ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। कांग्रेस ने गैस सिलेंडर की आपूर्ति में कमी और बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार दोनों पर निशाना साधा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने जनता को राहत न मिलने और आपूर्ति बाधित होने का आरोप लगाया।

इस पर बीजेपी ने पलटवार किया है। गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने कांग्रेस के आरोपों को भ्रामक और गैर जिम्मेदार बताते हुए विरोध किया। बेढम ने कहा कि डोटासरा प्रदेशवासियों को भ्रमित करने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं।

बीजेपी नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा स्वयं आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई की निगरानी कर रहे हैं और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि आमजन को किसी भी तरह की परेशानी न हो। इसके अलावा, राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय के साथ हर समस्या के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।

विशेषज्ञों का कहना है कि एलपीजी संकट जैसे मुद्दों पर सियासत तेज होना आम बात है, लेकिन आम नागरिकों की समस्याओं का जल्दी और पारदर्शी समाधान करना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि सिलेंडर आपूर्ति और कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के लिए सरकारी मशीनरी को लगातार निगरानी रखनी होगी।

राजस्थान में एलपीजी संकट का असर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों दोनों में देखा जा रहा है। लोग सिलेंडर के लिए कतारों में लगते दिख रहे हैं और कुछ क्षेत्रों में ब्लैक मार्केटिंग के आरोप भी सामने आए हैं। कांग्रेस ने इसे जनता की परेशानी बताया, जबकि बीजेपी ने इसे राजनीतिक हथकंडा करार दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे पर दोनों बड़े दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी रह सकता है, लेकिन जनता की सुविधा के लिए जरूरी है कि सरकार तत्काल प्रभाव से आपूर्ति बहाल करे और कीमतों में स्थिरता लाए।