करौली में सियासी घमासान: हंसराज मीणा और रमेश चंद मीणा के बीच आरोप–प्रत्यारोप
राजस्थान के करौली जिले की राजनीति में आरोप–प्रत्यारोप का दौर तेजी से बढ़ रहा है। जिले में हाल ही में राजनीतिक तनाव उस समय उभरकर सामने आया जब सपोटरा विधायक हंसराज मीणा और पूर्व कैबिनेट मंत्री रमेश चंद मीणा के बीच गंभीर आरोपों का खुला विवाद हुआ। मामला भ्रष्टाचार, अवैध खनन और पंचायत राज में अनियमितताओं से जुड़ा है।
करौली सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में पूर्व मंत्री रमेश चंद मीणा ने वर्तमान विधायक हंसराज मीणा पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में क्षेत्र में भ्रष्टाचार और अराजकता चरम पर पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि उनके अनुसार विधायक कोष का दुरुपयोग किया गया और पंचायत समिति में वित्तीय अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं।
पूर्व मंत्री ने इस दौरान यह भी कहा कि हत्या के एक संदिग्ध मामले में भी उचित कार्रवाई नहीं हुई और कानून व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न उठता है। रमेश चंद मीणा ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि मामले की उचित जांच नहीं हुई तो जिले में सियासी और सामाजिक अस्थिरता बढ़ सकती है।
इस प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने अवैध खनन और संसाधनों के दुरुपयोग की ओर भी ध्यान दिलाया। उनका कहना था कि कई खनन गतिविधियां बिना अनुमति और नियमों के संचालित की जा रही हैं, जिससे न केवल प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंच रहा है बल्कि स्थानीय जनता भी प्रभावित हो रही है।
वहीं, विधायक हंसराज मीणा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पूर्व मंत्री के बयान राजनीतिक उद्देश्य से भरे हुए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके कार्यकाल में कोई भी अनियमितता नहीं हुई और सभी कार्य कानूनी और पारदर्शी ढंग से किए गए हैं। उन्होंने पूर्व मंत्री पर व्यक्तिगत राजनीतिक लाभ के लिए जनता में भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि करौली जिले में यह आरोप–प्रत्यारोप अब सियासी माहौल को और गर्म कर सकता है। स्थानीय जनता में भी विवाद को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग पूर्व मंत्री के निष्पक्ष जांच की मांग का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ विधायक के तर्कों और उनके कार्यकाल की उपलब्धियों पर भरोसा जताते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि जिले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर आगामी चुनाव और राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। दोनों नेताओं के बीच जारी विवाद से यह भी स्पष्ट होता है कि करौली जिले में प्रशासनिक और सियासी दोनों ही दृष्टिकोणों से दबाव बढ़ रहा है।
इस घटना ने करौली में राजनीति के चरित्र को उजागर किया है, जहां भ्रष्टाचार, अनियमितताएं और संसाधनों के दुरुपयोग के आरोप नेताओं के बीच गंभीर बहस का कारण बन रहे हैं। अब स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों पर जिम्मेदारी बढ़ गई है कि वे निष्पक्ष जांच कराकर जनता का भरोसा कायम रखें और कानून व्यवस्था सुनिश्चित करें।
इस प्रकार, करौली जिले की राजनीति में आरोप–प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है, और जिले की जनता इस सियासी घमासान की दिशा और परिणाम पर बारीकी से नजर रख रही है।
