अलवर के शिशु अस्पताल में वार्ड की छत से गिरा प्लास्टर, वीडियो में जाने 10 नवजातों को तुरंत दूसरे वार्ड में किया गया शिफ्ट
राजस्थान के अलवर शहर स्थित गीतानंद शिशु अस्पताल में गुरुवार को बड़ा हादसा होते-होते टल गया। अस्पताल के एक वार्ड की छत के लैंटर से अचानक प्लास्टर (चूने) का एक हिस्सा भरभराकर नीचे गिर गया। राहत की बात यह रही कि जिस स्थान पर प्लास्टर गिरा, वहां उस समय कोई मरीज, परिजन या अस्पताल कर्मी मौजूद नहीं था, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।
घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने एहतियात बरतते हुए वार्ड में भर्ती करीब 10 नवजात शिशुओं को तुरंत दूसरे वार्ड में स्थानांतरित कर दिया। साथ ही क्षतिग्रस्त वार्ड को खाली कर मरम्मत कराने का निर्णय लिया गया है।
अचानक गिरा छत का प्लास्टर
अस्पताल में तैनात गार्ड सुरेंद्र यादव के अनुसार, गुरुवार दोपहर बाद वार्ड की छत से अचानक प्लास्टर का एक बड़ा हिस्सा नीचे गिर गया। घटना के समय वार्ड में कई नवजात शिशु भर्ती थे, लेकिन प्लास्टर उनसे कुछ दूरी पर गिरा, जिससे सभी सुरक्षित बच गए।घटना के तुरंत बाद अस्पताल स्टाफ ने स्थिति का जायजा लिया और सुरक्षा के मद्देनजर सभी नवजातों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया।
10 नवजातों को सुरक्षित स्थानांतरित किया गया
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि वार्ड के अलग-अलग बेड पर भर्ती करीब 10 नवजात शिशुओं को बिना किसी परेशानी के सुरक्षित दूसरे वार्ड में भर्ती कर दिया गया है। फिलहाल सभी बच्चों की स्थिति सामान्य बताई जा रही है।प्रशासन का कहना है कि मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रभावित वार्ड को फिलहाल बंद कर दिया गया है।
दो दिन पहले भी हुआ था ऐसा हादसा
गौरतलब है कि यह पहली घटना नहीं है। दो दिन पहले ही अलवर के काला कुआं सैटेलाइट अस्पताल में भी छत का प्लास्टर गिरने की घटना सामने आई थी। उस हादसे में एक डॉक्टर घायल हो गए थे और उनके सिर में गंभीर चोट आई थी।लगातार दो सरकारी अस्पतालों में छत से प्लास्टर गिरने की घटनाओं ने अस्पताल भवनों की स्थिति और रखरखाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वार्ड की होगी मरम्मत
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, प्रभावित वार्ड को खाली कर दिया गया है और जल्द ही उसकी मरम्मत का कार्य शुरू कराया जाएगा। साथ ही भवन की तकनीकी जांच भी कराई जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।स्थानीय लोगों ने भी अस्पताल भवनों की नियमित जांच और समय पर मरम्मत कराने की मांग की है, ताकि मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।:::
