राजस्थान में 15 साल से निशुल्क दवा योजना चला रहे फार्मासिस्ट, फिर भी वर्दी और धुलाई भत्ते से वंचित
राजस्थान में निशुल्क दवा योजना को शुरू हुए 15 साल हो चुके हैं। इस योजना को आम लोगों तक पहुंचाने और सरकारी अस्पतालों में दवाओं का वितरण सुनिश्चित करने में फार्मासिस्ट की अहम भूमिका है। इसके बावजूद प्रदेश के सरकारी फार्मासिस्ट अब भी वर्दी, धुलाई और जोखिम भत्ते जैसी सुविधाओं से वंचित हैं। इस स्थिति को लेकर फार्मासिस्ट कैडर की सुविधाओं और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को मिलने वाले भत्तों के बीच अंतर का मुद्दा सामने आया है।
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और दवा वितरण केंद्रों पर करीब 5,800 फार्मासिस्ट सेवाएं दे रहे हैं। ये कर्मचारी अस्पतालों में मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराने, दवा वितरण व्यवस्था संभालने और निशुल्क दवा योजना के संचालन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं। इसके बावजूद इन्हें कुछ ऐसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, जो चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के दूसरे कैडर के कर्मचारियों को दी जा रही हैं।
दूसरे कैडर को मिल रहे अलग-अलग भत्ते
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में नर्सिंग ऑफिसर, लैब टेक्नीशियन, एएनएम और असिस्टेंट रेडियोग्राफर जैसे विभिन्न कैडर को अलग-अलग प्रकार के भत्ते दिए जा रहे हैं। इनमें मैस भत्ता, हार्ड ड्यूटी भत्ता, वर्दी भत्ता और धुलाई भत्ता जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
वहीं फार्मासिस्टों को इन सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अस्पतालों और दवा वितरण केंद्रों पर नियमित रूप से जिम्मेदारी निभाने वाले फार्मासिस्टों को भी समान परिस्थितियों के अनुरूप सुविधाएं क्यों नहीं दी जा रही हैं।
निशुल्क दवा योजना में फार्मासिस्टों की अहम भूमिका
राजस्थान की निशुल्क दवा योजना का उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आने वाले मरीजों को जरूरी दवाएं मुफ्त उपलब्ध कराना है। इस व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में फार्मासिस्ट की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। अस्पतालों और दवा वितरण केंद्रों पर मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराने के साथ दवा वितरण से जुड़ी जिम्मेदारियां भी इन्हीं कर्मचारियों के माध्यम से पूरी होती हैं।
योजना के 15 साल पूरे होने के बावजूद फार्मासिस्टों की सुविधाओं का मुद्दा चर्चा में है। करीब 5,800 कर्मचारी प्रदेशभर में इस व्यवस्था का हिस्सा हैं, लेकिन उन्हें वर्दी, धुलाई और जोखिम भत्ते जैसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
समान सुविधाओं की मांग का मुद्दा
स्वास्थ्य विभाग के अलग-अलग कैडर को मिलने वाले भत्तों की तुलना में फार्मासिस्टों को सुविधाएं नहीं मिलने का मुद्दा कर्मचारियों के बीच असमानता का सवाल खड़ा करता है। फार्मासिस्टों को भी उनकी कार्यप्रकृति और जिम्मेदारियों के अनुसार सुविधाएं दिए जाने की जरूरत पर चर्चा हो रही है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि फार्मासिस्टों की ओर से इन भत्तों के लिए विभाग को कब और कितनी बार मांग-पत्र दिया गया है। न ही इस संबंध में विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आया है। अब देखना होगा कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग फार्मासिस्टों की इन सुविधाओं से जुड़ी मांग पर क्या निर्णय लेता है।
