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बाड़मेर में तृतीय श्रेणी टीचरों का स्थाईकरण 4 महीने से अटका, एक्सक्लूसिव वीडियो में देंखे अशोक गहलोत ने उठाया सवाल

बाड़मेर में तृतीय श्रेणी टीचरों का स्थाईकरण 4 महीने से अटका, एक्सक्लूसिव वीडियो में देंखे अशोक गहलोत ने उठाया सवाल
 
बाड़मेर में तृतीय श्रेणी टीचरों का स्थाईकरण 4 महीने से अटका, एक्सक्लूसिव वीडियो में देंखे अशोक गहलोत ने उठाया सवाल

राजस्थान के बाड़मेर जिले में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थाईकरण की प्रक्रिया पिछले चार महीनों से अटकी हुई है। इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकार से सवाल उठाए हैं और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

गहलोत ने बताया कि कांग्रेस सरकार के दौरान भर्ती हुए टीचर जिनका प्रोबेशन सितंबर 2025 में पूरा हो चुका है, उनके स्थाईकरण का काम अब तक लंबित है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि बाड़मेर जिले के करीब 2000 तृतीय श्रेणी शिक्षकों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। प्रदेश के अन्य जिलों में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन बाड़मेर के शिक्षक अभी भी 70 प्रतिशत वेतन कटौती का सामना कर रहे हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि बाड़मेर के कई नवनियुक्त टीचरों ने उनसे संपर्क किया और इस असमयिक स्थाईकरण से उत्पन्न मानसिक तनाव की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह स्थिति न केवल शिक्षकों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि शिक्षा के स्तर पर भी असर डाल रही है।

गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से अपील की है कि जल्द से जल्द स्थाईकरण की प्रक्रिया को पूरा किया जाए। उन्होंने कहा, “कांग्रेस सरकार के दौरान रीट भर्ती परीक्षा के माध्यम से चयनित ये टीचर प्रदेश के भविष्य को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनका स्थाईकरण अटका होना अस्वीकार्य है।”

शिक्षकों का कहना है कि स्थाईकरण प्रक्रिया में देरी के कारण वे आर्थिक और मानसिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि 70 प्रतिशत वेतन कटौती ने उनकी वित्तीय स्थिति को काफी कमजोर कर दिया है। इससे उनका मनोबल गिर रहा है और पढ़ाई के साथ-साथ व्यक्तिगत जीवन में भी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला शिक्षा और प्रशासनिक प्रक्रिया दोनों के दृष्टिकोण से संवेदनशील है। अशोक गहलोत के ट्वीट और सवाल ने इस मुद्दे को सार्वजनिक ध्यान में ला दिया है। उन्होंने सरकार पर दबाव बनाया है कि वे शिक्षक स्थाईकरण के मामले में जल्द कार्रवाई करें।

बाड़मेर जिले में तृतीय श्रेणी शिक्षकों की संख्या लगभग 2000 है, जिनमें से अधिकांश को पिछले चार महीनों से स्थाईकरण का इंतजार है। स्थानीय शिक्षा अधिकारियों के अनुसार, स्थाईकरण प्रक्रिया में देरी के कई कारण हैं, लेकिन स्पष्ट समाधान अभी तक नहीं निकल पाया है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द इस मामले को सुलझाया, तो इसके सामाजिक और राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का मनोबल और शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना आवश्यक है।

इस मुद्दे को लेकर अब शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के स्तर पर भी चर्चा शुरू हो गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले हफ्तों में टीचरों का स्थाईकरण पूरा किया जाएगा और उन्हें कटौती से राहत मिलेगी।