कोटा-भीलवाड़ा में बंद व्यवस्थाओं के बीच खुले आसमान में सोने को मजबूर लोग, रैन बसेरों के दरवाजे बंद
राजस्थान के कई शहरों में बर्फीली रात ने नागरिकों के लिए वास्तविकता का कठिन चेक पेश किया। कोटा और भीलवाड़ा में ठंड ने लोगों की परेशानियों को बढ़ा दिया, खासकर उन लोगों के लिए जो रात में बाहर रहने को मजबूर हैं।
कोटा में ठंडी हवाओं के बीच कई लोगों ने आश्रय खोजने की कोशिश की, लेकिन शहर में जगह की कमी के कारण कई लोगों को खुले आसमान में रात बितानी पड़ी। स्थानीय प्रशासन ने शेल्टर होम्स उपलब्ध कराए हैं, लेकिन सीमित क्षमता और बढ़ते जरूरतमंदों के कारण सभी को जगह नहीं मिल पाई। राहगीरों और मजदूरों ने बताया कि रात के तापमान ने उनकी तकलीफ बढ़ा दी।
वहीं भीलवाड़ा में भी स्थिति कम गंभीर नहीं रही। कई शेल्टर होम्स और सार्वजनिक व्यवस्थाओं को ताले लगाकर बंद कर दिया गया था। ऐसे में गरीब और जरूरतमंद लोग, जो ठंड से बचने के लिए इन व्यवस्थाओं पर निर्भर थे, मजबूरी में खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर हुए। स्थानीय लोगों ने बताया कि ठंडी हवाओं और शीतलहर के बीच रात बिताना बहुत कठिन था।
स्थानीय प्रशासन ने बताया कि सीमित संसाधनों और अचानक बढ़ते ठंड के चलते सभी की मदद करना चुनौतीपूर्ण रहा। उन्होंने कहा, “हमने शेल्टर होम्स खोल रखे हैं और अतिरिक्त चादरें और गर्म कपड़े वितरित किए हैं। लेकिन सर्दी की तीव्रता और जरूरतमंदों की संख्या को देखते हुए सभी को तत्काल सहायता प्रदान करना संभव नहीं हो पाया।”
विशेषज्ञों का कहना है कि राजस्थान में सर्दियों के दौरान इस तरह की ठंडी रातें आम होती हैं, लेकिन इस बार तापमान में अचानक गिरावट और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की सीमित क्षमता ने समस्या को और बढ़ा दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में नागरिकों को सुरक्षित आश्रय, गर्म कपड़े और खाने-पीने की सुविधाएं सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए।
स्थानीय नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया है कि शेल्टर होम्स की संख्या बढ़ाई जाए और उन्हें बेहतर संसाधनों से लैस किया जाए ताकि आने वाले दिनों में ठंड के दौरान कोई व्यक्ति खुले में न सोने को मजबूर हो।
स्थानीय लोगों का कहना है कि खुले आसमान में रात बिताने के दौरान उन्हें ठंड के कारण स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई लोगों ने सिरदर्द, ठंड से कंपन और सांस लेने में कठिनाई की शिकायत की। ऐसे में राहत कार्य और तत्काल प्रशासनिक मदद बेहद जरूरी हो गई है।
इस बर्फीली रात ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ठंड के मौसम में शहरों और कस्बों में व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण है। मरुधरा में प्रशासन, नागरिक और सामाजिक संस्थाओं के बीच सहयोग से ही इस तरह की कठिन परिस्थितियों में राहत और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
