राजस्थान में पंचायत चुनाव फिर अटके! प्रधान-सरपंच की लॉटरी से 2 दिन पहले आया बड़ा आदेश
राजस्थान में पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच एक बार फिर तस्वीर बदलती नजर आ रही है। प्रधान और सरपंच पदों के आरक्षण की लॉटरी निकलने से ठीक दो दिन पहले ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की ओर से आदेश जारी किया गया है। इस आदेश के बाद लंबे समय से चुनाव की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों की चिंता बढ़ गई है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी किया। इसके बाद उन लोगों की उम्मीदों पर फिर पानी फिर गया है, जो काफी समय से पंचायत चुनाव में अपनी सीट के आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे थे। आरक्षण की तस्वीर साफ नहीं होने से संभावित प्रत्याशी यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि उन्हें किस सीट से चुनाव की तैयारी करनी है।
पंचायत चुनाव में सरपंच और प्रधान पदों के आरक्षण की प्रक्रिया चुनाव कार्यक्रम का अहम हिस्सा होती है। आरक्षण तय होने के बाद ही कई संभावित उम्मीदवार अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दे पाते हैं। ऐसे में लॉटरी से ठीक पहले जारी हुए आदेश ने चुनावी तैयारियों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।
गांवों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे कई दावेदार लंबे समय से आरक्षण की लॉटरी का इंतजार कर रहे हैं। कई संभावित प्रत्याशियों ने अपने स्तर पर जनसंपर्क भी शुरू कर रखा है। लेकिन सीट आरक्षित होने या सामान्य रहने की स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण अब उनकी तैयारियों पर असर पड़ सकता है।
विभाग के नए आदेश के बाद पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। संभावित उम्मीदवारों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आरक्षण की लॉटरी कब होगी और इसका चुनाव प्रक्रिया पर क्या असर पड़ेगा।
हालांकि, सिर्फ आदेश जारी होने से चुनाव पूरी तरह टलने की स्थिति को अंतिम रूप से नहीं माना जा सकता। चुनाव की अगली प्रक्रिया और तारीखों को लेकर विभाग की ओर से आने वाले निर्देश महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल सबसे ज्यादा नजर प्रधान और सरपंच पदों के आरक्षण की लॉटरी पर है।
लंबे समय से पंचायत चुनाव की तैयारी कर रहे दावेदारों के लिए आने वाले दिनों में तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस पंचायत में कौन सा पद किस वर्ग के लिए आरक्षित होगा और संभावित उम्मीदवार उसी आधार पर अपनी आगे की रणनीति तय कर सकेंगे।
