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खर्चे का हिसाब नहीं देने वाले पंच-सरपंचों पर गिरेगी गाज, वीडियो में देखें दोबारा चुनाव लड़ने पर लग सकती है रोक

खर्चे का हिसाब नहीं देने वाले पंच-सरपंचों पर गिरेगी गाज, वीडियो में देखें दोबारा चुनाव लड़ने पर लग सकती है रोक
 
खर्चे का हिसाब नहीं देने वाले पंच-सरपंचों पर गिरेगी गाज, वीडियो में देखें दोबारा चुनाव लड़ने पर लग सकती है रोक

पिछले पंचायत चुनाव में खर्च का ब्योरा जमा नहीं कराने वाले पंच, सरपंच और अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है। ऐसे प्रत्याशियों के दोबारा चुनाव लड़ने पर रोक लगने की संभावना है। राज्य चुनाव आयोग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही जिला कलेक्टरों को दिशा-निर्देश जारी कर सकता है, ताकि ऐसे प्रत्याशियों की सूची तैयार की जा सके जिन्होंने तय समय में चुनावी खर्च का विवरण नहीं दिया था।

राज्य चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, पंचायत चुनाव लड़ने वाले हर प्रत्याशी के लिए अपने चुनावी खर्च का पूरा विवरण देना अनिवार्य होता है। यदि कोई प्रत्याशी खर्च का ब्योरा निर्धारित समय सीमा में जमा नहीं करता है, तो उस पर तीन साल तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। आयोग का यह प्रावधान चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए लागू किया गया है, लेकिन पिछले चुनावों में इसका बड़े स्तर पर पालन नहीं हुआ।

प्रदेश में आगामी मार्च-अप्रैल माह में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में चुनाव आयोग अब पुराने मामलों की समीक्षा कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, आयोग जल्द ही सभी जिला कलेक्टरों से ऐसे पंच, सरपंच और अन्य प्रतिनिधियों की सूची मांगेगा, जिन्होंने पिछले चुनाव के बाद खर्च का विवरण जमा नहीं कराया था। सूची मिलने के बाद आयोग की ओर से संबंधित प्रत्याशियों पर कार्रवाई की जा सकती है।

नियमानुसार जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, मुखिया, सरपंच, पंच और वार्ड सदस्य पद के लिए चुनाव लड़ने वाले प्रत्येक प्रत्याशी को चुनाव परिणाम घोषित होने के 15 दिनों के भीतर अपने चुनावी खर्च का पूरा ब्योरा राज्य चुनाव आयोग को देना होता है। इस विवरण में प्रचार-प्रसार, वाहन, पोस्टर, बैनर, सभाएं और अन्य मदों में किए गए खर्च का उल्लेख अनिवार्य होता है।

आयोग के स्तर पर किए गए आकलन में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि प्रदेशभर में हजारों प्रत्याशियों ने समय पर खर्च का विवरण जमा नहीं कराया था। इनमें कई ऐसे प्रत्याशी भी शामिल हैं जो वर्तमान में पंच, सरपंच या अन्य पदों पर निर्वाचित हैं और अब दोबारा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। यदि आयोग नियमों के तहत सख्ती से कार्रवाई करता है, तो ऐसे कई प्रत्याशी आगामी चुनाव से बाहर हो सकते हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में राज्य चुनाव आयोग ने पंचायत चुनावों में उम्मीदवारों की चुनावी खर्च सीमा में बढ़ोतरी भी की है। इसके बावजूद खर्च के विवरण को लेकर लापरवाही बरती गई, जिस पर अब आयोग सख्त रुख अपनाने के संकेत दे रहा है। आयोग का मानना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो नियमों की अनदेखी को बढ़ावा मिलेगा।

इस संभावित कार्रवाई से पंचायत स्तर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कई मौजूदा जनप्रतिनिधि अब अपने पुराने रिकॉर्ड खंगालने में जुट गए हैं। वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि नियम सभी के लिए समान हैं और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सख्ती जरूरी है। आने वाले दिनों में आयोग के दिशा-निर्देश जारी होते ही स्थिति और साफ हो जाएगी।