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पाली के शहीद भंवर सिंह राठौड़ को ‘शहादत को सलाम’ कार्यक्रम में किया सम्मानित

पाली के शहीद भंवर सिंह राठौड़ को ‘शहादत को सलाम’ कार्यक्रम में किया सम्मानित
 
पाली के शहीद भंवर सिंह राठौड़ को ‘शहादत को सलाम’ कार्यक्रम में किया सम्मानित

पाली जिले के पोसालिया निवासी शहीद भंवर सिंह राठौड़ की शहादत को याद करते हुए आयोजित ‘शहादत को सलाम’ कार्यक्रम में उनकी वीरगाथा और परिजनों का सम्मान किया। शहीद भंवर सिंह ने 21 जुलाई 2008 को जम्मू-कश्मीर के पुंछ क्षेत्र में आतंकियों से मुकाबला करते हुए वीरगति पाई थी।

कार्यक्रम में शहीद के परिवारजन और उनके परिजनों के साथ ही वीरांगनाओं को भी सम्मानित किया गया। आयोजकों ने शहीद की बहादुरी और देशभक्ति की मिसाल को याद करते हुए कहा कि उनके अदम्य साहस और त्याग को भुलाया नहीं जा सकता। कार्यक्रम में शहीद के जीवन और उनके संघर्ष की झलक दिखाने वाले वीडियो और फोटो प्रदर्शित किए गए, जिन्होंने उपस्थित लोगों की आंखों में आंसू और दिलों में गर्व दोनों ही भर दिए।

राजस्थान पत्रिका के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ने शहीद भंवर सिंह राठौड़ की बहादुरी की सराहना की और कहा कि देश के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले वीरों की वीरता हमेशा याद रखी जाएगी। उन्होंने परिवार वालों को साहस और गर्व के संदेश दिए।

कार्यक्रम में शहीद की पत्नी, बच्चे और अन्य परिवारजन उपस्थित रहे। उन्हें स्मृति चिन्ह और सम्मान पत्र देकर उनकी वीरता और बलिदान को सराहा गया। शहीद की पत्नी ने कहा, "हमारे परिवार के लिए भंवर सिंह हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहे हैं। उनकी शहादत ने हमें देशभक्ति और कर्तव्यपरायणता का पाठ पढ़ाया। राजस्थान पत्रिका द्वारा उनके बलिदान को याद करना हमारे लिए गर्व की बात है।"

स्थानीय लोग और स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने शहीद की वीरता को याद करते हुए अपने विचार साझा किए और कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवा पीढ़ी में देशभक्ति की भावना को मजबूत करते हैं।

राजस्थान पत्रिका के संपादक ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य शहीदों के बलिदान को सम्मान देना और समाज में यह संदेश फैलाना है कि देशभक्ति और त्याग का मूल्य अपार है। उन्होंने कहा कि शहीदों की कहानियां आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा हैं और ऐसे कार्यक्रम उन्हें उनके योगदान के लिए श्रद्धांजलि अर्पित करने का माध्यम हैं।

कार्यक्रम में शहीद भंवर सिंह की वीरगाथा सुनाने वाले वक्ताओं ने बताया कि 21 जुलाई 2008 को पुंछ में आतंकियों से मुकाबला करते हुए भंवर सिंह ने अपने साहस और कौशल का परिचय दिया। उनका यह अदम्य साहस और त्याग अन्य सैनिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना।