कोर्ट के आदेश पर जल संसाधन विभाग के अधिशाषी अभियंता की संपत्ति कुर्क, महकमे में हड़कंप
राजस्थान के जल संसाधन विभाग में सोम कमला आंबा बांध नहर खंड, आसपुर के अधिशाषी अभियंता के खिलाफ कोर्ट के आदेश के बाद भूमि और भवन कुर्की का नोटिस जारी किया गया है। नोटिस चस्पा होने के बाद विभाग और महकमे में हड़कंप मच गया है।
सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन में की गई है। नोटिस के अनुसार अधिशाषी अभियंता की व्यक्तिगत संपत्ति, जिसमें कार्यालय भवन और आसपास की भूमि शामिल है, पर कुर्की की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह आदेश उस मामले से जुड़ा है जिसमें संपत्ति के संबंध में कानूनी विवाद या बकाया भुगतान का मुद्दा कोर्ट में लंबित था।
जल संसाधन विभाग के सूत्रों ने बताया कि नोटिस चस्पा होने के बाद विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी हैरान हैं। महकमे में यह चर्चा जोरों पर है कि कैसे यह आदेश लागू हुआ और इससे कार्यप्रणाली पर क्या असर पड़ेगा। कुछ अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई विभागीय प्रतिष्ठा और प्रशासनिक कार्यों के लिए संदेशात्मक भी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी अधिकारी और विभागीय कर्मचारियों के खिलाफ कोर्ट के आदेश का पालन करना अनिवार्य है। यदि कोई अधिकारी किसी संपत्ति या वित्तीय विवाद में अदालत के आदेश का उल्लंघन करता है, तो कोर्ट कुर्की जैसे कड़े कदम उठा सकती है। यह कार्रवाई न केवल कानून की शक्ति को दर्शाती है, बल्कि अनुशासन और जवाबदेही का भी उदाहरण है।
महकमे के भीतर अधिकारी और कर्मचारी इस घटना को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि यह पहली बार है जब किसी वरिष्ठ अधिकारी की संपत्ति पर ऐसी कुर्की कार्रवाई देखने को मिली है। अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई से महकमे में कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निर्णयों की समीक्षा की संभावना भी बढ़ सकती है।
स्थानीय कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत के आदेश के पालन में कुर्की की प्रक्रिया आवश्यक होती है। यह सुनिश्चित करता है कि कानूनी दायित्व और बकाया भुगतान समय पर पूरा हो। उन्होंने कहा कि इस मामले में अधिशाषी अभियंता को भी अदालत में उचित जवाब देने का अवसर मिलेगा।
अंततः, कोर्ट के आदेश के बाद जल संसाधन विभाग के अधिशाषी अभियंता की भूमि और भवन पर कुर्की का नोटिस चस्पा होने से महकमे में हलचल मच गई है। यह मामला न केवल विभागीय अधिकारियों के लिए चेतावनी है, बल्कि यह दर्शाता है कि कानून के तहत किसी भी सरकारी अधिकारी को अपनी जिम्मेदारियों और दायित्वों से पीछे हटने का अधिकार नहीं है।
