राजधानी Jaipur में ही नहीं कई जिलो में चल रहा वीआईपी नंबर का गड़बड़-घोटाला, अब विभाग खंगालेगा 10 साल का रिकॉर्ड

परिवहन विभाग अब पुराने वाहनों के वीआईपी नंबर फर्जी तरीके से रखने के मामले में सख्त कार्रवाई करने जा रहा है। विभाग सभी आरटीओ कार्यालयों से रिपोर्ट मांग रहा है। विभाग इस बात की जांच करेगा कि पुराने नंबर वाले वाहनों को रखने का काम सही है या नहीं। जयपुर आरटीओ प्रथम द्वारा इस फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद विभाग सक्रिय मोड में आ गया है। इधर, विभाग ने भले ही दो कार्मिकों पर कार्रवाई की हो। लेकिन इस मामले में जयपुर आरटीओ के अन्य लिपिकों की भूमिका भी संदिग्ध सामने आ रही है। वजह यह है कि आरटीओ प्रथम ने जिन 79 वाहनों के बैकलॉग में यह फर्जीवाड़ा पकड़ा है, वह महज एक दिन में ही हो गया। जबकि आरटीओ में फर्जीवाड़े का यह खेल पिछले 10 साल से चल रहा है। कई लिपिकों ने गैर परिवहन शाखा में इस पद पर काम किया है। इस दौरान सैकड़ों पुराने वाहनों के नंबरों को रखने का काम किया गया। पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है।
पुराने रिकॉर्ड गायब, पन्ने फटे
इसे देखते हुए आरटीओ पिछले 10 साल में बैकलॉग वाले वाहनों के रिकॉर्ड की भी जांच कर रहा है। आरटीओ राजेंद्र सिंह शेखावत का कहना है कि 1989 से पहले के सभी वाहनों के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। यह देखा जा रहा है कि वाहनों में कोई और फर्जीवाड़ा तो नहीं हुआ है। दूसरी ओर आरटीओ में पुराने रिकॉर्ड गायब होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। रिकॉर्ड गायब होने और पन्ने फाड़ने के मामले को आरटीओ ने भी गंभीरता से लिया है। परिवहन आयुक्त शुचि त्यागी ने बताया कि पूरे प्रकरण में सभी आरटीओ कार्यालयों से रिपोर्ट ली जा रही है। मुख्यालय स्तर पर जांच करेंगे। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डीटीओ की भूमिका
संदिग्ध पुराने वाहनों के नंबर बरकरार रखने की प्रक्रिया डीटीओ की अनुमति के बिना नहीं हो सकती। जयपुर के अलावा झुंझुनूं, दौसा, सवाई माधोपुर, जोधपुर और सलूंबर आरटीओ कार्यालयों में भी ऐसे मामले सामने आए हैं। इन कार्यालयों के डीटीओ भी सवालों के घेरे में हैं। जयपुर में मामला सामने आने के बाद अब फर्जीवाड़े को दबाने के लिए आनन-फानन में प्रयास किए जा रहे हैं।