खारी-मानसी नदियों पर खनन माफिया पर एनजीटी सख्त, प्रशासन अलर्ट मोड में
भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा और केकड़ी क्षेत्र की जीवनदायिनी मानी जाने वाली खारी नदी और मानसी नदी के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे को लेकर अब सख्त कार्रवाई शुरू हो गई है। इन नदियों में अवैध खनन कर रहे माफिया के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाया है, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है।
दरअसल, अरावली की पहाड़ियों से निकलने वाली ये दोनों नदियां क्षेत्र के लिए जल का प्रमुख स्रोत मानी जाती हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से इन नदियों के किनारों और जलधाराओं में अवैध खनन के कारण इनके अस्तित्व पर खतरा बढ़ता जा रहा था। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए एनजीटी की सेंट्रल ज़ोन बेंच भोपाल ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए सख्ती दिखाई है।
एनजीटी के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है। भीलवाड़ा जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू ने बुधवार को आदेश जारी कर संबंधित अधिकारियों की नियुक्ति कर दी है। इन अधिकारियों को अवैध खनन पर रोक लगाने और नदियों की स्थिति की निगरानी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नदियों में किसी भी प्रकार का अवैध खनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके लिए पुलिस और खनन विभाग की संयुक्त टीमें भी गठित की जा रही हैं, जो लगातार निगरानी रखेंगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगी। साथ ही, नदी क्षेत्र में नियमित निरीक्षण और रिपोर्टिंग की व्यवस्था भी लागू की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते अवैध खनन पर रोक नहीं लगाई गई, तो इन नदियों का प्राकृतिक स्वरूप पूरी तरह नष्ट हो सकता है। इससे न केवल जल संकट गहराएगा, बल्कि क्षेत्र की पारिस्थितिकी पर भी गंभीर असर पड़ेगा।
स्थानीय लोगों ने भी एनजीटी के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि लंबे समय से अवैध खनन के कारण नदियों का जलस्तर घट रहा था और पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा था। अब सख्त कार्रवाई से उम्मीद है कि स्थिति में सुधार आएगा।
