डेजर्ट नेशनल पार्क में मिली नई जंपिंग स्पाइडर ‘मोग्रस शुष्का’, वैज्ञानिकों में उत्साह
राजस्थान के जैसलमेर स्थित डेजर्ट नेशनल पार्क (DNP) से वैज्ञानिकों ने जंपिंग स्पाइडर की एक नई प्रजाति की खोज की है, जिसे मोग्रस शुष्का (Mogrus shushka) नाम दिया गया है। इस खोज ने न केवल भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय का ध्यान भी आकर्षित किया है, क्योंकि यह रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र की जैव विविधता को और गहराई से समझने में मदद करती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार यह प्रजाति अत्यधिक गर्म, शुष्क और कम नमी वाले रेतीले वातावरण में आसानी से जीवित रह सकती है। इसका नाम संस्कृत शब्द “शुष्क” से प्रेरित है, जो इसके रेगिस्तानी आवास और अनुकूलन क्षमता को दर्शाता है। शोध में सामने आया है कि यह प्रजाति राजस्थान और गुजरात के शुष्क इलाकों में पाई जाती है और कठोर परिस्थितियों में भी खुद को ढालने में सक्षम है।
कई नई प्रजातियों का भी खुलासा
इस अध्ययन में केवल मोग्रस शुष्का ही नहीं, बल्कि अन्य कई नई और महत्वपूर्ण प्रजातियों की भी पहचान की गई है। शोधकर्ताओं ने बताया कि इस रिसर्च के दौरान लैंगेलुरिलस उदयपुरीएनसिस सहित अन्य स्पाइडर प्रजातियों का भी विवरण सामने आया है, जिससे राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में छिपी जैव विविधता की व्यापक तस्वीर मिली है।
इसके अलावा, वैज्ञानिकों ने एक पहले से ज्ञात लेकिन अब तक अधूरी जानकारी वाली प्रजाति मोग्रस राजस्थानेंसिस के नर का भी पहली बार वैज्ञानिक विवरण दर्ज किया है, जिससे इस जीनस की समझ और मजबूत हुई है।
रेगिस्तान में जैव विविधता का नया केंद्र
शोधकर्ताओं का कहना है कि राजस्थान के रेगिस्तानी और पथरीले इलाके अब “अरैक्निड (मकड़ी) विविधता का उभरता हुआ हॉटस्पॉट” बनकर सामने आ रहे हैं। डेजर्ट नेशनल पार्क और आसपास के क्षेत्र में अब तक 100 से अधिक स्पाइडर प्रजातियों का रिकॉर्ड किया जा चुका है, और आगे और नई खोजों की संभावना जताई जा रही है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि ये मकड़ियां पारिस्थितिकी तंत्र में अहम भूमिका निभाती हैं, क्योंकि ये कीटों की संख्या नियंत्रित कर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं। इससे फसलों की सुरक्षा भी अप्रत्यक्ष रूप से होती है।
वैश्विक स्तर पर महत्व
इस खोज को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक जर्नल्स में प्रकाशित किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह अध्ययन केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक जैव विविधता अनुसंधान के लिए भी महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों के अनुसार थार रेगिस्तान और आसपास के क्षेत्र अभी भी कई अनदेखी प्रजातियों का घर हो सकते हैं।
