जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में बेस्टसेलिंग सह-लेखकों की नई किताब ‘लीनस्पार्क’ का विमोचन
भारत की किफायती लेकिन असरदार नवाचार संस्कृति पर आधारित नई किताब ‘लीनस्पार्क: फ्रूगल बाई डिजाइन, ग्लोबल इन इम्पैक्ट’ का विमोचन जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में किया गया। यह किताब चर्चित लेखक और शिक्षाविद जयदीप प्रभु (कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी), प्रियांक नारायण (अशोका यूनिवर्सिटी) और मुकेश सूद (आईआईएम अहमदाबाद) द्वारा सह-लेखकित है।
कार्यक्रम में लेखक समूह ने बताया कि किताब का मुख्य उद्देश्य यह दिखाना है कि कैसे भारतीय नवाचार और संसाधनों की सीमाओं के बावजूद छोटे और प्रभावशाली समाधानों को डिज़ाइन करके वैश्विक स्तर पर प्रभाव डाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि किताब में उन तरीकों और मॉडल्स का विस्तार से अध्ययन किया गया है, जिनके जरिए कंपनियां और स्टार्टअप न्यूनतम संसाधनों में अधिकतम प्रभाव पैदा कर सकते हैं।
जयदीप प्रभु ने कहा, “भारत की लीन और फ्रूगल नवाचार संस्कृति विश्व स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रही है। हमारी किताब इस दृष्टिकोण को छात्रों, उद्यमियों और नीति निर्माताओं तक पहुँचाने का प्रयास है।” प्रियांक नारायण ने जोड़ा कि यह किताब व्यावहारिक उदाहरणों और केस स्टडीज के माध्यम से दिखाती है कि कैसे संसाधन-संकुल वातावरण में भी नवाचार किया जा सकता है।
मुकेश सूद ने बताया कि किताब में केवल व्यावहारिक समाधान ही नहीं बल्कि वैश्विक प्रभाव और स्थायी विकास के पहलुओं को भी ध्यान में रखा गया है। उन्होंने कहा कि इसे पढ़कर युवा उद्यमी और नीतिनिर्माता समझ सकते हैं कि सीमित संसाधनों में भी कैसे वैश्विक स्तर पर प्रभाव डाला जा सकता है।
विमोचन समारोह में साहित्यिक हस्तियों, शिक्षाविदों और विद्यार्थियों की बड़ी संख्या में मौजूदगी रही। कार्यक्रम के दौरान चर्चा में यह बात सामने आई कि लीनस्पार्क जैसे नवाचार मॉडल न केवल भारत में बल्कि वैश्विक मंच पर भी असर डाल सकते हैं और युवा पीढ़ी को प्रेरित कर सकते हैं।
किताब को जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में पेश किया जाना इसके महत्व और विषयवस्तु को दर्शाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह किताब स्टार्टअप, प्रबंधन और सामाजिक उद्यमिता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक के रूप में काम करेगी।
इस प्रकार ‘लीनस्पार्क’ केवल नवाचार की तकनीकी या व्यावहारिक समझ ही नहीं देती, बल्कि यह यह संदेश भी देती है कि सीमित संसाधनों में भी सोच और डिज़ाइन के माध्यम से वैश्विक प्रभाव पैदा किया जा सकता है।
