Aapka Rajasthan

‘नारी शक्ति वंदन’ संशोधन और राजनीतिक हलचल: कई राज्यों में विशेष सत्र, वीडियो में देंखे राजस्थान में अब तक नहीं हुई कार्रवाई

‘नारी शक्ति वंदन’ संशोधन और राजनीतिक हलचल: कई राज्यों में विशेष सत्र, वीडियो में देंखे राजस्थान में अब तक नहीं हुई कार्रवाई
 
‘नारी शक्ति वंदन’ संशोधन और राजनीतिक हलचल: कई राज्यों में विशेष सत्र, वीडियो में देंखे राजस्थान में अब तक नहीं हुई कार्रवाई

‘नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम’ को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। यह प्रस्ताव 17 अप्रैल को लोकसभा में पास नहीं हो सका, जिसमें कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने इसके खिलाफ मतदान किया था। इसके बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया।

🏛️ बीजेपी का राष्ट्रव्यापी अभियान

लोकसभा में विधेयक के पारित न होने के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के केंद्रीय नेतृत्व ने इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाते हुए देशभर में अभियान शुरू किया। पार्टी की ओर से विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस के खिलाफ राष्ट्रव्यापी विरोध और निंदा अभियान चलाया गया।इसी क्रम में बीजेपी शासित राज्यों को निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने राज्यों में विधानसभा के विशेष सत्र बुलाकर विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करें। केंद्र की ओर से इसके लिए 30 अप्रैल की डेडलाइन तय की गई थी।

🏛️ कई राज्यों में विशेष सत्र, निंदा प्रस्ताव पारित

निर्देशों के बाद कई बीजेपी शासित राज्यों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए विशेष सत्र बुलाए। इनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड शामिल हैं, जहां विधानसभा में निंदा प्रस्ताव पारित कर दिया गया है।इसके अलावा दिल्ली, छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सरकारों ने भी विशेष सत्र बुलाकर इस प्रस्ताव पर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है या प्रक्रिया पूरी कर ली है।

⚠️ राजस्थान में अब तक कोई कदम नहीं

इन राज्यों के विपरीत राजस्थान में अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। सरकार की ओर से न तो विशेष सत्र बुलाया गया है और न ही निंदा प्रस्ताव को लेकर कोई आधिकारिक प्रक्रिया शुरू हुई है।राजनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है कि केंद्र के निर्देशों के बावजूद राजस्थान में देरी क्यों हो रही है।

📊 राजनीतिक बहस तेज

इस पूरे घटनाक्रम ने केंद्र और राज्यों के बीच राजनीतिक समन्वय और रणनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विपक्षी दल इस मुद्दे को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि सत्ताधारी पक्ष इसे राजनीतिक जवाबी कार्रवाई के रूप में आगे बढ़ा रहा है।