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नागौरी अश्वगंधा को मिला GI टैग, राजस्थान के जीआई प्रमाणित उत्पादों की संख्या बढ़कर हुई 22

नागौरी अश्वगंधा को मिला GI टैग, राजस्थान के जीआई प्रमाणित उत्पादों की संख्या बढ़कर हुई 22
 
नागौरी अश्वगंधा को मिला GI टैग, राजस्थान के जीआई प्रमाणित उत्पादों की संख्या बढ़कर हुई 22

केंद्र सरकार ने नागौर के एक अनोखे पौधे, नागौरी अश्वगंधा को ऑफिशियली ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग दे दिया है। यह पौधे बेहतरीन दवाइयों के गुणों से भरपूर है। इससे नागौर इंटरनेशनल लेवल पर एक नए एग्रीकल्चरल ब्रांड के तौर पर स्थापित हो गया है। यह मारवाड़ इलाके और खासकर नागौर जिले के किसानों के लिए एक ऐतिहासिक और गर्व का पल है। सोजत की मेहंदी के बाद एग्रीकल्चर कैटेगरी में यह राजस्थान की दूसरी बड़ी कामयाबी है।

नागौरी वेलफेयर सोसाइटी के मेंटर अमन चौधरी ने इसे नागौरी अश्वगंधा की प्योरिटी और क्वालिटी पर केंद्र सरकार की आखिरी मंज़ूरी बताया। उन्होंने कहा कि यह टैग न सिर्फ प्रोडक्ट को लीगल प्रोटेक्शन देगा बल्कि एग्रीकल्चर सेक्टर में इनोवेशन और रिसर्च को भी बढ़ावा देगा। युवाओं का झुकाव दवाइयों की खेती की तरफ बढ़ेगा।

जामुन का गहरा, चमकीला लाल रंग
एग्रीकल्चर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नागौर का सूखा मौसम और रेतीली मिट्टी अश्वगंधा उगाने के लिए बहुत अच्छी है, यही वजह है कि नागौर अश्वगंधा की जड़ें दूसरे इलाकों में पैदा होने वाले अश्वगंधा के मुकाबले ज़्यादा मज़बूत, लंबी और दवाइयों के गुणों, खासकर एल्कलॉइड से भरपूर होती हैं। इसके फल, बेरी का गहरा, चमकीला लाल रंग इसकी अच्छी क्वालिटी का साफ़ संकेत है। इन्हीं खासियतों के आधार पर, केंद्र सरकार ने 'नागौरी अश्वगंधा' को GI टैग दिया है, जो अपनी भौगोलिक और औषधीय पहचान बनाए रखता है।

आर्थिक खुशहाली के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।

GI टैग से नागौर ज़िले के हज़ारों किसानों के लिए आर्थिक खुशहाली के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। अब, कोई दूसरा व्यक्ति या संस्था ग्लोबल मार्केट में 'नागौरी अश्वगंधा' नाम का गलत इस्तेमाल नहीं कर पाएगी। इससे मिलावट पर असरदार तरीके से रोक लगेगी। किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिलेगा। बिचौलियों की भूमिका कम होगी। इंटरनेशनल दवा और आयुर्वेदिक कंपनियाँ सीधे किसानों से संपर्क कर पाएंगी। एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि इससे अश्वगंधा की कीमत में काफ़ी बढ़ोतरी होगी, एक्सपोर्ट बढ़ेगा और इलाके में प्रोसेसिंग यूनिट लगने से रोज़गार के नए मौके बनेंगे।

यह बड़ी कामयाबी नागौरी वेलफ़ेयर सोसाइटी की डायरेक्टर पारुल चौधरी की लगातार और लगन से की गई कोशिशों की वजह से है। उन्होंने GI टैग प्रोसेस को आगे बढ़ाने के लिए ज़मीनी लेवल पर बहुत काम किया। ICAR आनंद (गुजरात) के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. परमेश्वरलाल सरन और राज्य के एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट ने टेक्निकल सपोर्ट और ज़रूरी डेटा देकर मिशन को सफल बनाने में मदद की।

राजस्थान के 22वें प्रोडक्ट को GI टैग मिला
नागौरी अश्वगंधा के GI लिस्ट में शामिल होने से, राजस्थान के GI-सर्टिफाइड प्रोडक्ट्स की संख्या बढ़कर 22 हो गई है। इनमें पहले से ही बीकानेरी भुजिया, मकराना मार्बल और कोटा डोरिया जैसे जाने-माने नाम शामिल हैं।

क्या हैं फायदे?
GI टैग मिलने के बाद, 'नागौरी अश्वगंधा' नाम सुरक्षित रहेगा। इससे इन्वेस्टर्स या ट्रेडर्स नाम का गलत इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। इससे यह पक्का होगा कि किसानों को उनके प्रोडक्ट का सही दाम मिले। इंटरनेशनल मार्केट में सिर्फ़ सर्टिफाइड 'नागौरी अश्वगंधा' ही बेचा जाएगा, जिससे मिलावट कम होगी और क्वालिटी बनी रहेगी। विदेशी फार्मास्यूटिकल और हर्बल कंपनियां अब नागौर में सीधे किसानों से खरीद सकती हैं। इससे किसानों को बेहतर डील मिलने के चांस बढ़ जाएंगे। दवा वाले गुणों वाली इस फसल की डिमांड मार्केट में लगातार बढ़ रही है। एक एकड़ ज़मीन से कई क्विंटल जड़ें मिल सकती हैं। अगर किसानों को अच्छा दाम मिले तो उनकी इनकम बढ़ेगी। अभी, पूरे देश में करीब 5,000 हेक्टेयर और नागौर में 500 हेक्टेयर में अश्वगंधा उगाया जाता है। पूरे देश में करीब 1,600 टन अश्वगंधा पैदा होता है। इसमें नागौर का हिस्सा 10% है।

नागौरी वेलफेयर सोसाइटी के हेड अमन चौधरी का कहना है कि अब ऑर्गनाइज़ेशन और एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट मिलकर यह पक्का करेंगे कि इस प्रोडक्ट को खेतों में ज़्यादा जगह मिले। किसानों को जानकारी देने, उन्हें टेक्निकल मदद देने और इसकी क्वालिटी सुधारने और पैदावार बढ़ाने के लिए बेहतर बीज देने की कोशिश की जाएगी।