SMS अस्पताल में फिर दिखी बदइंतजामी! अचानक गुल हुई बिजली, ओपीडी से लेकर जांच सेवाएं ठप, मरीज घंटों रहे परेशान
प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सवाई मान सिंह (SMS) अस्पताल में गुरुवार सुबह एक बार फिर व्यवस्थाओं की पोल खुलती नजर आई। अस्पताल के धन्वंतरी ब्लॉक, बांगड़ परिसर और मुख्य भवन (मेन बिल्डिंग) सहित कई हिस्सों में अचानक बिजली गुल हो गई। बिजली आपूर्ति बाधित होने से अस्पताल की कई महत्वपूर्ण सेवाएं प्रभावित हो गईं, जिससे इलाज के लिए पहुंचे सैकड़ों मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
सुबह के समय अस्पताल में मरीजों की सबसे अधिक भीड़ रहती है। ऐसे में बिजली गुल होने के कारण ओपीडी पर्ची बनाने, जांचों के बिल जारी करने, एक्स-रे, पैथोलॉजी और अन्य डायग्नोस्टिक सेवाओं का काम प्रभावित हो गया। कंप्यूटर आधारित सेवाएं बंद होने से मरीजों की लंबी कतारें लग गईं और कई लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा।अस्पताल पहुंचे मरीजों ने बताया कि सुबह से ही पर्ची बनवाने और जांच कराने के लिए लाइन में खड़े थे, लेकिन बिजली नहीं होने के कारण पूरा सिस्टम ठप हो गया। कई बुजुर्ग, महिलाएं और गंभीर मरीज भी इस अव्यवस्था से परेशान नजर आए। कुछ मरीजों ने आरोप लगाया कि समय पर इलाज और जांच नहीं होने से उनकी परेशानी और बढ़ गई।
बिजली बाधित होने का असर केवल पंजीकरण और बिलिंग तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि कई विभागों में डिजिटल सिस्टम पर आधारित कार्य भी प्रभावित हुए। अस्पताल प्रशासन ने बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए तकनीकी टीम को मौके पर लगाया, जिसके बाद आपूर्ति सामान्य करने के प्रयास शुरू किए गए।प्रदेश का सबसे बड़ा रेफरल अस्पताल होने के कारण SMS अस्पताल में रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में कुछ समय के लिए भी बिजली बाधित होने से पूरी व्यवस्था प्रभावित हो जाती है। इससे अस्पताल की आपातकालीन तैयारियों और बैकअप सिस्टम को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि इतने बड़े सरकारी अस्पताल में निर्बाध बिजली आपूर्ति और मजबूत बैकअप व्यवस्था सुनिश्चित होनी चाहिए, ताकि तकनीकी खराबी का असर मरीजों के इलाज पर न पड़े।फिलहाल अस्पताल प्रशासन बिजली बाधित होने के कारणों की जांच कर रहा है। बिजली आपूर्ति सामान्य होने के बाद सेवाओं को फिर से सुचारु किया गया, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर अस्पताल की व्यवस्थाओं और आपदा प्रबंधन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं
