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दूध बेचने वाला बना 'फर्जी थानेदार', खाकी पहनकर युवाओं को लगाया लाखों का चूना; ऐसे हुआ भंडाफोड़

दूध बेचने वाला बना 'फर्जी थानेदार', खाकी पहनकर युवाओं को लगाया लाखों का चूना; ऐसे हुआ भंडाफोड़
 
दूध बेचने वाला बना 'फर्जी थानेदार', खाकी पहनकर युवाओं को लगाया लाखों का चूना; ऐसे हुआ भंडाफोड़

राजस्थान की पिंक सिटी जयपुर में पुलिस ने एक ऐसे शातिर धोखेबाज को गिरफ्तार किया है जिसकी कहानी सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। एक आदमी जो कल तक रातों-रात अमीर बनने के लिए गाय-भैंस बेचकर और दूध की डेयरी चलाकर ठगी का धंधा शुरू कर दिया, उसने खाकी वर्दी पहनकर और "नकली पुलिस स्टेशन ऑफिसर" बनकर ठगी का धंधा शुरू कर दिया। जयपुर की सिंधी कैंप पुलिस ने सिंधी कैंप से इस नकली 'रमन शर्मा' को पकड़ा। सिंधी कैंप थाने के SHO माधो सिंह ने बताया, "लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि एक आदमी सिंधी कैंप और रेलवे स्टेशन इलाके में घूम रहा है, जो खुद को स्पेशल टीम का पुलिस स्टेशन ऑफिसर बता रहा है। पुलिस ने जाल बिछाया और आरोपी जितेंद्र कुमार शर्मा उर्फ ​​रमन शर्मा को पकड़ लिया। आरोपी मूल रूप से करौली जिले के टोडाभीम का रहने वाला है।" तलाशी के दौरान जो मिला उससे पुलिस भी हैरान रह गई।

आरोपी के पास से कांस्टेबल रैंक का नकली पुलिस ID कार्ड, SI की वर्दी, पुलिस कैप और बेल्ट और ठगी से जुड़े दूसरे डॉक्यूमेंट्स मिले हैं।

आरोपी के पास से कांस्टेबल रैंक का नकली पुलिस ID कार्ड, SI की यूनिफॉर्म, पुलिस कैप और बेल्ट और फ्रॉड से जुड़े दूसरे डॉक्यूमेंट्स मिले हैं।

फॉरेस्ट गार्ड की नौकरी का वादा करके लाखों रुपये ऐंठ लिए थे

यह नकली SHO उन बेरोज़गार युवाओं को टारगेट करता था जो नौकरी की तलाश में जयपुर आए थे। आरोपी ने जयपुर के एक युवक को 'फॉरेस्ट गार्ड' की सरकारी नौकरी दिलाने का वादा करके अपने जाल में फंसाया था। पीड़ित उसकी खाकी यूनिफॉर्म और हैंडसम लुक के झांसे में आ गया और आरोपी ने उससे एडवांस के तौर पर लाखों रुपये ले लिए थे। इस पूरे स्कैम का खुलासा तब हुआ जब उसे नौकरी मिल गई या पैसे वापस नहीं मिले।

स्पेशल टीम का मेंबर होने का दावा किया

पुलिस पूछताछ में पता चला कि जितेंद्र शर्मा बहुत चालाक फ्रॉड करने वाला था। उसका टारगेट बाहर से रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड आने वाले भोले-भाले युवा होते थे। वह खुद को स्पेशल टीम (DST) का SHO बताता और उन्हें सरकारी नौकरी दिलाने या पुलिस केस से निकालने में मदद करने का वादा करता। फिर इस काम की आड़ में एडवांस कैश लेकर फरार हो जाता। ईमानदारी का काम छोड़कर उसने जुर्म कबूल कर लिया।

हैरानी की बात है कि आरोपी जितेंद्र शर्मा असल में डेयरी फार्म चलाता था। वह गाय-भैंस खरीदता-बेचता था। लेकिन, लग्ज़री ज़िंदगी जीने की चाहत ने उसे जल्द ही क्रिमिनल एक्टिविटी की तरफ़ खींच लिया। उसने बाज़ार से यूनिफ़ॉर्म और टोपी खरीदी और लोगों के भरोसे (खाकी पर) का फ़ायदा उठाकर शिकार करना शुरू कर दिया।