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मिडिल ईस्ट संघर्ष का असर अजमेर तक, एलपीजी महंगी होने से ऑटो चालकों पर बढ़ा बोझ

मिडिल ईस्ट संघर्ष का असर अजमेर तक, एलपीजी महंगी होने से ऑटो चालकों पर बढ़ा बोझ
 
मिडिल ईस्ट संघर्ष का असर अजमेर तक, एलपीजी महंगी होने से ऑटो चालकों पर बढ़ा बोझ

मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के कई हिस्सों में दिखाई देने लगा है, जिसका सीधा प्रभाव राजस्थान के अजमेर शहर पर भी पड़ रहा है। एलपीजी (रसोई गैस) और ऑटो-सीएनजी से जुड़े खर्चों में बढ़ोतरी के कारण स्थानीय परिवहन व्यवस्था और आम लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।

अजमेर में ऑटो चालकों का कहना है कि एलपीजी के दाम बढ़ने और गैस की आपूर्ति में अनिश्चितता के चलते उनकी रोज़मर्रा की कमाई प्रभावित हो रही है। पहले से ही बढ़ती ईंधन लागत और अब गैस की किल्लत ने उन्हें दोहरी चुनौती में डाल दिया है।

ऑटो चालकों का कहना है कि रोजाना चलने वाले खर्च में तेजी से इजाफा हुआ है, जबकि किराया दरों में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है। इसके कारण उनकी आय और खर्च के बीच संतुलन बिगड़ गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है, जिससे एलपीजी और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है।

स्थानीय ऑटो यूनियनों ने प्रशासन से मांग की है कि बढ़ती लागत को देखते हुए किराया पुनर्निर्धारण पर विचार किया जाए, ताकि ड्राइवरों को राहत मिल सके। साथ ही गैस आपूर्ति को नियमित बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की गई है।

भारत सरकार की ऊर्जा नीति से जुड़े जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय संकटों के दौरान घरेलू उपभोक्ताओं पर प्रभाव को कम करने के लिए सब्सिडी और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को मजबूत करने की आवश्यकता होती है।

फिलहाल अजमेर में ऑटो चालकों और उपभोक्ताओं दोनों को ही महंगाई और आपूर्ति संकट की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। स्थिति सामान्य होने तक राहत की उम्मीद कम दिखाई दे रही है।