संगीत के सुरों के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश, फुटेज में देखें जयपुर में ‘रूट फॉर मैंग्रोव्स’ कॉन्सर्ट में विशाल-शेखर ने बांधा समां
गुलाबी नगरी जयपुर में संगीत और पर्यावरण संरक्षण का अनोखा संगम देखने को मिला, जब ‘रूट फॉर मैंग्रोव्स’ कॉन्सर्ट का आयोजन किया गया। जी स्टूडियोज में आयोजित इस खास कार्यक्रम में मशहूर म्यूजिक डायरेक्टर जोड़ी विशाल और शेखर की लाइव परफॉर्मेंस ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। संगीत के जरिए प्रकृति बचाने का संदेश देने वाले इस कॉन्सर्ट ने युवाओं के बीच खास उत्साह पैदा किया।
यह आयोजन सिग्नेचर पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर की ओर से किया गया, जिसका उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि मैंग्रोव वनों के संरक्षण और उनके पुनर्जीवन को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाना भी है। आयोजकों के अनुसार, इस कॉन्सर्ट सीरीज को जयपुर के बाद गुरुग्राम और हैदराबाद में भी आयोजित किया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंचाया जा सके।
कार्यक्रम की शुरुआत से ही माहौल ऊर्जा से भर गया। जैसे ही विशाल और शेखर मंच पर पहुंचे, दर्शकों की तालियों और हूटिंग से पूरा परिसर गूंज उठा। विशाल ने फिल्म ‘बाजीराव मस्तानी’ के लोकप्रिय गीत ‘बजने दे धड़क-धड़क’ से परफॉर्मेंस की शुरुआत की, जिसने श्रोताओं में नई एनर्जी भर दी। इसके बाद उन्होंने अपने कई सुपरहिट गानों की प्रस्तुति दी, जिन पर युवा देर रात तक थिरकते रहे।
करीब दो घंटे तक चली इस म्यूजिकल शाम में हर गाने के साथ दर्शकों का उत्साह बढ़ता गया। खास बात यह रही कि ठंड बढ़ने के बावजूद युवाओं का जोश कम नहीं हुआ। सर्द हवाओं के बीच भी ग्राउंड में मौजूद भीड़ अंत तक डटी रही और कलाकारों का भरपूर साथ देती रही।
कॉन्सर्ट के अंतिम 15 मिनटों में शेखर ने पियानो पर अपनी शानदार प्रस्तुति दी, जिसने माहौल को और भी भावुक और संगीतमय बना दिया। उनकी धुनों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरे आयोजन को यादगार बना दिया।
आयोजकों ने बताया कि मैंग्रोव वन पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद जरूरी हैं। ये तटीय इलाकों को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने, जैव विविधता को बनाए रखने और कार्बन उत्सर्जन कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में संगीत जैसे लोकप्रिय माध्यम से लोगों को इस मुद्दे से जोड़ने की पहल की गई है।
‘रूट फॉर मैंग्रोव्स’ कॉन्सर्ट ने यह साबित कर दिया कि मनोरंजन के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी प्रभावी ढंग से दिया जा सकता है। जयपुर की इस संगीतमय शाम ने न सिर्फ दर्शकों का दिल जीता, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम भी बढ़ाया।
