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अलवर के सरिस्का जंगल में भीषण आग, वीडियो में देखें 2 हेक्टेयर में पेड़ पौधे जलकर राख

अलवर के सरिस्का जंगल में भीषण आग, वीडियो में देखें 2 हेक्टेयर में पेड़ पौधे जलकर राख
 
अलवर के सरिस्का जंगल में भीषण आग, वीडियो में देखें 2 हेक्टेयर में पेड़ पौधे जलकर राख

अलवर जिले के सरिस्का टाइगर रिज़र्व के टहला रेंज में मंगलवार शाम अचानक जंगल में आग फैल गई, जिसने करीब 2 हेक्टेयर वन क्षेत्र को पूरी तरह बर्बाद कर दिया। आग इतनी तेजी से फैल गई कि वन संपदा को भारी नुकसान हुआ, लेकिन दमकल और वन विभाग की कड़ी मशक्कत के बाद लगभग 5 घंटे बाद आग पर नियंत्रण पाया गया।

घटना टहला रेंज के तालाब क्षेत्र में हुई, जहाँ अज्ञात कारणों से आग भड़क उठी और वन के पेड़‑पौधे, झाड़ियाँ और सूखी पत्तियाँ भयंकर रूप से जलने लगीं। घटना के बाद वन विभाग के कृष्ण कुमार के नेतृत्व में लगभग 15 वनकर्मियों ने तुरंत अग्निशमन कार्य शुरू किया। उन्होंने पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ लंबी फायर लाइन बनाकर आग को फैलने से रोका और धीरे‑धीरे इसे नियंत्रित किया।

आग करीब शाम 6 बजे भड़की थी और देर रात तक आग पर पूरी तरह नियंत्रण पाया गया। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ समय से गर्मियों की शुरुआत में सरिस्का क्षेत्र में आग लगने की घटनाएं बढ़ी हैं, इसलिए इस बार भी शुरुआती भाग में ही यह आग फैल गई।

वन विभाग की चिंता इस बात को लेकर भी है कि जंगल में आग लगने से सरिस्का का प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो सकता है, क्योंकि यह क्षेत्र वन्यजीवों का घर है और यहाँ बाघ समेत अन्य कई प्रजातियाँ पाई जाती हैं। वहीं आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता अभी नहीं चल सका है और जांच जारी है।

यह बात दिलचस्प है कि इसी साल और पिछले साल भी इसी क्षेत्र में आग लगने की घटनाएँ दर्ज की गई थीं, जिससे वन विभाग सतर्क है और भविष्य में आग की रोकथाम के उपायों को और मजबूत करने पर विचार कर रहा है।

सरिस्का टाइगर रिज़र्व का जंगल अरावली पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है और यह राजस्थान के लिए जैव विविधता को संरक्षित रखने के साथ‑साथ पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। वन विभाग के अधिकारी और स्थानीय प्रशासन जंगलों में आग पर नज़र रखने और त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए अतिरिक्त तैयारियाँ कर रहे हैं, ताकि ऐसी घटनाओं को जल्द रोका जा सके और वन्यजीवों तथा पर्यावरण को बचाया जा सके।

इस घटना ने एक बार फिर वनों में आग की रोकथाम और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता को उजागर किया है, खासकर जब गर्मी का मौसम आ रहा है और जंगलों में आग लगने की घटनाएँ बढ़ सकती हैं।