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JEN भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में बड़े खुलासे, वीडियो में देखें दोबारा लीक कर कैंडिडेट्स को पढ़वाया गया पेपर

JEN भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में बड़े खुलासे, वीडियो में देखें दोबारा लीक कर कैंडिडेट्स को पढ़वाया गया पेपर
 
JEN भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में बड़े खुलासे, वीडियो में देखें दोबारा लीक कर कैंडिडेट्स को पढ़वाया गया पेपर

जूनियर इंजीनियर (JEN) भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की जांच के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। जांच में सामने आया है कि JEN भर्ती परीक्षा-2020 के निरस्त होने के बाद जब अभ्यर्थियों ने अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए, तो नकल गिरोह ने उन्हें संतुष्ट करने के लिए एक बार फिर पेपर लीक कर परीक्षा से पहले पढ़वाया था। यह पूरा खेल बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया।

SOG की जांच के अनुसार, परीक्षा से महज आधे घंटे पहले पेपर लीक गिरोह के मास्टरमाइंड जगदीश विश्नोई के हैंडलर्स अभ्यर्थियों को लीक हुआ प्रश्नपत्र पढ़ाते थे और इसके बाद उन्हें सीधे परीक्षा केंद्र तक छोड़कर आते थे। इस पूरे ऑपरेशन में अभ्यर्थियों को यह भरोसा दिलाया जाता था कि वे परीक्षा में निश्चित रूप से सफल होंगे। गिरोह ने इस तरीके से कई उम्मीदवारों से मोटी रकम वसूली।

एडीजी (SOG) विशाल बंसल ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि जांच के बाद SOG ने पेपर लीक के मास्टरमाइंड जगदीश विश्नोई और उसके सहयोगी गणपतलाल को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में सामने आया कि जगदीश विश्नोई ने अपने गिरोह के साथ मिलकर 12 सितंबर 2021 को आयोजित JEN संयुक्त भर्ती परीक्षा का पेपर परीक्षा से ठीक पहले लीक किया था। यह पेपर पहले से तय कैंडिडेट्स को उपलब्ध कराया गया, जिससे वे परीक्षा में लाभ उठा सकें।

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि जगदीश विश्नोई ने JEN भर्ती परीक्षा का पेपर करीब 35 लाख रुपए में बेचा था। यह रकम अलग-अलग अभ्यर्थियों और उनके संपर्कों से वसूली गई थी। SOG के अनुसार, गिरोह ने परीक्षा प्रणाली की कमजोरियों का फायदा उठाते हुए दोनों ही वर्षों में परीक्षा की गोपनीयता को भंग किया।

गौरतलब है कि JEN भर्ती परीक्षा का पेपर वर्ष 2020 और 2021, दोनों ही बार लीक हुआ था। 2020 की परीक्षा निरस्त होने के बाद अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ गई थी और उन्होंने गिरोह से पैसे लौटाने की मांग की थी। इसी दबाव के चलते गिरोह ने 2021 की परीक्षा में दोबारा पेपर लीक कर अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले पढ़वाने का खतरनाक तरीका अपनाया।

SOG अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल थे, पेपर कहां से और कैसे हासिल किया गया, और कितने अभ्यर्थियों को इसका फायदा पहुंचाया गया। साथ ही, इस मामले में अन्य सरकारी कर्मचारियों या परीक्षा से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

SOG अधिकारियों का कहना है कि पेपर लीक जैसे मामलों पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। इस खुलासे के बाद एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।