राजस्थान में मूल निवास प्रमाण पत्र नियमों में बड़ा बदलाव, वीडियो में जाने नई पात्रता और प्रक्रिया लागू
राजस्थान सरकार ने मूल निवास प्रमाण पत्र (Domicile Certificate) जारी करने की प्रक्रिया में अहम बदलाव किए हैं। गृह विभाग द्वारा जारी नए आदेशों के तहत अब प्रमाण पत्र जारी करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर अधिक अधिकारियों को अधिकृत किया गया है और पात्रता के दायरे को भी बढ़ाया गया है।
नए प्रावधानों के अनुसार अब कलेक्टर, उपखंड अधिकारी (SDM), सहायक कलेक्टर और तहसीलदार को मूल निवास प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है। इससे आवेदन प्रक्रिया को अधिक सरल और सुलभ बनाने की कोशिश की गई है।
सरकार के नए नियमों के तहत अब वे लोग भी मूल निवास प्रमाण पत्र के लिए पात्र होंगे जो पिछले 10 साल या उससे अधिक समय से राज्य में किराए के मकान में रह रहे हैं। यह बदलाव उन लोगों के लिए राहत माना जा रहा है जो लंबे समय से राजस्थान में रहकर काम कर रहे हैं लेकिन स्थायी निवास प्रमाण नहीं था।
इसके अलावा, नए आदेश में सरकारी कर्मचारियों के परिवारों को भी विशेष सुविधा दी गई है। जिन आवेदकों के माता-पिता राजस्थान सरकार की सेवा में कम से कम 3 साल से कार्यरत हैं, वे स्वयं और उनके बच्चे भी मूल निवास प्रमाण पत्र के लिए पात्र होंगे।
प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए अब आवेदन के साथ शपथ पत्र देना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही आवेदक को दो जिम्मेदार व्यक्तियों से अनुशंसा प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत करना होगा, जिससे दस्तावेजों की सत्यता सुनिश्चित की जा सके।
इन नए नियमों का उद्देश्य प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और वास्तविक पात्र व्यक्तियों को आसानी से लाभ देना बताया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि इससे फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगेगी और लंबे समय से राज्य में रह रहे लोगों को कानूनी पहचान मिल सकेगी।
राज्य सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
