शिक्षा विभाग का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 1653 सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपलों के तबादले; 10 दिन में जॉइन करने के निर्देश
राजस्थान में तबादला सत्र के अंतिम दिन शिक्षा विभाग ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए एक साथ 1653 सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपलों का तबादला कर दिया। माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी इस आदेश के तहत प्रदेश के लगभग सभी जिलों में प्रिंसिपलों की नई नियुक्तियां की गई हैं। सभी स्थानांतरित प्रिंसिपलों को 10 दिनों के भीतर अपने नए कार्यस्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।
जानकारी के अनुसार, शुरुआत में विभाग ने करीब 500 प्रिंसिपलों के तबादले की सूची तैयार की थी, लेकिन अंतिम दो दिनों में इसमें बड़े पैमाने पर बदलाव करते हुए संख्या बढ़ाकर 1653 कर दी गई। शुक्रवार सुबह करीब 5:30 बजे माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने इस सूची पर ई-हस्ताक्षर कर तबादला आदेश जारी किए।
शहरों से गांव और गांव से शहर तक बड़ा फेरबदल
नई तबादला सूची में कई वर्षों से शहरी क्षेत्रों में कार्यरत प्रिंसिपलों को ग्रामीण स्कूलों में भेजा गया है। वहीं, दूर-दराज के जिलों में लंबे समय से सेवाएं दे रहे कई प्रिंसिपलों को उनके गृह जिले में पदस्थापन का अवसर मिला है।इसके साथ ही कुछ प्रिंसिपलों को उनके गृह जिले से हटाकर दूसरे जिलों में भी भेजा गया है। विभाग का कहना है कि तबादलों में प्रशासनिक आवश्यकता, रिक्त पदों और संतुलन को ध्यान में रखा गया है।
पुराने तबादलों में भी हुआ बदलाव
इस बार की सूची की एक खास बात यह रही कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शहर से गांव या गांव से शहर स्थानांतरित किए गए कई प्रिंसिपलों के पदस्थापन में भी बदलाव किया गया है। नई सूची में ऐसे कई अधिकारियों की पोस्टिंग दोबारा बदली गई है।
कई को राहत, कई अब भी निराश
पिछले दो वर्षों से तबादले का इंतजार कर रहे अनेक प्रिंसिपलों को इस आदेश से राहत मिली है। कई अधिकारियों को उनकी पसंद या गृह जिले के आसपास नियुक्ति मिली है। हालांकि, कुछ प्रिंसिपल ऐसे भी हैं जिन्हें इस बार भी मनचाहा स्थान नहीं मिल सका।
शिक्षा विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर नए विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, जिला शिक्षा अधिकारियों को भी तबादला प्रक्रिया को समय पर पूरा कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है।राज्य में एक साथ 1653 प्रिंसिपलों के तबादले को हाल के वर्षों का सबसे बड़ा प्रशासनिक फेरबदल माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे विद्यालयों में प्रशासनिक व्यवस्था को नया स्वरूप मिलेगा और लंबे समय से लंबित पदस्थापन संबंधी मामलों का भी समाधान हो सकेगा।
