जयपुर हाउसिंग बोर्ड पर लोक अदालत का फैसला, दुकानों के ट्रांसफर में देरी पर 42 हजार का जुर्माना
जयपुर महानगर प्रथम की स्थाई लोक अदालत ने हाउसिंग बोर्ड के खिलाफ बड़ा फैसला सुनाया है। नीलामी में सफल बोलीदाता के पक्ष में दुकानों की सेल डीड (विक्रय पत्र) समय पर निष्पादित नहीं करने पर अदालत ने हाउसिंग बोर्ड पर 42 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
दुकानों का ट्रांसफर न करने पर कार्रवाई
मामले के अनुसार, हाउसिंग बोर्ड ने नीलामी प्रक्रिया में सफल बोलीदाता के नाम पर दुकानों का विक्रय पत्र समय पर जारी नहीं किया, जिससे विवाद उत्पन्न हुआ।
लोक अदालत का सख्त निर्देश
लोक अदालत ने हाउसिंग बोर्ड को आदेश दिया है कि वह अगले दो महीने के भीतर दोनों दुकानों का ट्रांसफर परिवादी के नाम पूरा करे। साथ ही जुर्माने की राशि भी अदा करनी होगी।
उपभोक्ता हितों पर जोर
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है, ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल
इस फैसले के बाद हाउसिंग बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। वहीं, कानूनी जानकारों का कहना है कि यह फैसला सरकारी संस्थानों को समय पर कार्य पूरा करने के लिए एक संदेश है।
