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कोटा में पानी से भरी खदानों से रोज निकल रहा चुनाई पत्थर, खनिज विभाग के रिकॉर्ड में जारी है खनन; हकीकत कुछ और

कोटा में पानी से भरी खदानों से रोज निकल रहा चुनाई पत्थर, खनिज विभाग के रिकॉर्ड में जारी है खनन; हकीकत कुछ और
 
कोटा में पानी से भरी खदानों से रोज निकल रहा चुनाई पत्थर, खनिज विभाग के रिकॉर्ड में जारी है खनन; हकीकत कुछ और

कोटा जिले की दीगोद तहसील के पचारा क्षेत्र के झोपड़ियां इलाके में खनन को लेकर चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है। यहां बारिश के बाद से अधिकांश खदानें पानी से भरी हुई हैं। पानी भरने के कारण इन खदानों में फिलहाल खनन कार्य संभव नहीं है, लेकिन खनिज विभाग के रिकॉर्ड में इन खदानों से रोजाना चुनाई पत्थर निकाला जाना दर्ज हो रहा है। ऐसे में सरकारी रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति के बीच अंतर को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, पचारा के झोपड़ियां क्षेत्र में बड़ी संख्या में पत्थर की खदानें संचालित हैं। इन खदानों में बारिश के दौरान पानी भर गया था। बारिश बंद होने के बाद भी अधिकांश खदानों से पानी की निकासी नहीं हो पाई है। इसके चलते खदानों में मशीनों और मजदूरों के जरिए खनन करना मुश्किल बना हुआ है।

मौके पर पानी, रिकॉर्ड में रोजाना खनन

क्षेत्र की खदानों की मौजूदा स्थिति और खनिज विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़ों के बीच अंतर सामने आया है। बताया जा रहा है कि जहां खदानों में पानी भरा होने के कारण पत्थर निकालना संभव नहीं है, वहीं विभागीय रिकॉर्ड में रोजाना चुनाई पत्थर का उत्पादन दिखाया जा रहा है।

इस स्थिति ने खनन गतिविधियों की निगरानी और विभागीय रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि खदानों में वास्तव में खनन कार्य बंद है तो रोजाना पत्थर निकालने का रिकॉर्ड कैसे दर्ज हो रहा है, यह जांच का विषय है।

रिकॉर्ड और वास्तविकता की जांच जरूरी

खनन क्षेत्र में इस तरह का अंतर सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर निरीक्षण और रिकॉर्ड की जांच की जरूरत महसूस की जा रही है। यह पता लगाना जरूरी है कि विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज उत्पादन वास्तविक है या नहीं। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि खदानों में पानी भरा होने के बावजूद उत्पादन की एंट्री किस आधार पर की जा रही है।

खनन से जुड़े मामलों में उत्पादन का सही रिकॉर्ड रखना जरूरी होता है। इससे सरकारी राजस्व और खनिज संसाधनों के इस्तेमाल का हिसाब रखा जाता है। ऐसे में पचारा के झोपड़ियां क्षेत्र की खदानों में दर्ज उत्पादन और मौके की स्थिति का मिलान करने से पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सकती है।

फिलहाल इस मामले में खनिज विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया और जांच की जानकारी सामने नहीं आई है।