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खेत में लगाए लोहे के तारों में फंसा लेपर्ड, घंटों तड़पने के बाद हुई मौत

खेत में लगाए लोहे के तारों में फंसा लेपर्ड, घंटों तड़पने के बाद हुई मौत
 
खेत में लगाए लोहे के तारों में फंसा लेपर्ड, घंटों तड़पने के बाद हुई मौत

राजस्थान के जालोर जिले में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां खेत की रखवाली के लिए लगाए गए लोहे के तारों में फंसने से एक लेपर्ड (तेंदुए) की मौत हो गई। तारों में उलझने के बाद लेपर्ड काफी देर तक खुद को छुड़ाने की कोशिश करता रहा। वह कभी जोर-जोर से उछलता तो कभी दहाड़ता रहा। उसकी आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीणों में भी डर का माहौल बन गया।

घटना की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी। लेपर्ड को बचाने के लिए जोधपुर से रेस्क्यू टीम भी बुलाई गई, लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी।

फसल बचाने के लिए लगाए थे लोहे के तार

यह घटना जालोर के आजबर रोड से बीठन रोड के बीच स्थित एक खेत में रविवार रात से सोमवार सुबह के बीच हुई। वन विभाग के अनुसार, खेत में खड़ी फसल को जंगली जानवरों से बचाने के लिए चारों ओर लोहे के तार लगाए गए थे।

रेंजर प्रवीण सिंह ने बताया कि आशंका है कि लेपर्ड रविवार रात को जवाई बांध या सिरोही क्षेत्र से होते हुए आजबर रोड की ओर पहुंचा था। इसी दौरान वह खेत में घुसा और उसका पैर व शरीर लोहे के तारों में बुरी तरह फंस गया।

घंटों तक करता रहा निकलने की कोशिश

तारों में फंसने के बाद लेपर्ड ने खुद को छुड़ाने के लिए काफी संघर्ष किया। वह कई घंटों तक छटपटाता रहा। कभी वह तेजी से उछलने की कोशिश करता तो कभी जोर-जोर से दहाड़ता।

लेपर्ड की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। हालांकि, डर के कारण कोई भी उसके करीब जाने की हिम्मत नहीं कर सका। ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी।

रेस्क्यू टीम पहुंचने से पहले हुई मौत

सूचना मिलने के बाद वन विभाग ने जोधपुर से रेस्क्यू टीम बुलवाई, ताकि लेपर्ड को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही लेपर्ड दम तोड़ चुका था।

इसके बाद वन विभाग की टीम ने उसके शव को कब्जे में लिया और रामसीन वन चौकी लेकर पहुंची। यहां पशु चिकित्सकों की टीम ने लेपर्ड का पोस्टमार्टम किया।

वन्यजीवों के लिए खतरा बन रहे खेतों के तार

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि खेतों के चारों ओर लगाए जाने वाले तार कई बार वन्यजीवों के लिए जानलेवा साबित होते हैं। जंगल और आबादी वाले क्षेत्रों के बीच आने-जाने वाले जानवर इनमें फंस जाते हैं और समय पर मदद नहीं मिलने पर उनकी मौत हो जाती है।

जालोर क्षेत्र में लेपर्ड की मौजूदगी पहले भी सामने आती रही है। ऐसे में वन विभाग ग्रामीणों से अपील करता है कि खेतों में ऐसे इंतजाम न करें, जिससे वन्यजीवों को नुकसान पहुंचे।