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भीलवाड़ा में लोन लेकर बच्चों को हवाई यात्रा करवाने वाले लेक्चरर का ट्रांसफर, वीडियो में देखें 8 डिग्री ठंड में छात्रों ने स्कूल के बाहर बिताई रात

भीलवाड़ा में लोन लेकर बच्चों को हवाई यात्रा करवाने वाले लेक्चरर का ट्रांसफर, वीडियो में देखें 8 डिग्री ठंड में छात्रों ने स्कूल के बाहर बिताई रात
 
भीलवाड़ा में लोन लेकर बच्चों को हवाई यात्रा करवाने वाले लेक्चरर का ट्रांसफर, वीडियो में देखें 8 डिग्री ठंड में छात्रों ने स्कूल के बाहर बिताई रात

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले से शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक भावुक और चिंताजनक मामला सामने आया है। जिले के नंदराय कस्बे स्थित राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक स्कूल में कार्यरत एक लेक्चरर के ट्रांसफर से नाराज छात्र सड़कों पर उतर आए। कड़ाके की सर्दी और करीब 8 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच छात्रों ने स्कूल परिसर के बाहर धरना दिया और पूरी रात वहीं बिताई। मंगलवार सुबह भी छात्रों का यह धरना जारी रहा।

मामला 11 जनवरी का है, जब स्कूल में कार्यरत लेक्चरर शंकरलाल जाट का स्थानांतरण कर दिया गया। ट्रांसफर की सूचना मिलने के बाद छात्रों में नाराजगी फैल गई। छात्रों का कहना है कि लेक्चरर शंकरलाल जाट न केवल अच्छे शिक्षक हैं, बल्कि वे छात्रों की पढ़ाई और मार्गदर्शन में विशेष भूमिका निभाते रहे हैं। उनके अचानक ट्रांसफर से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी।

लेक्चरर के ट्रांसफर के विरोध में छात्र सोमवार शाम करीब 4 बजे स्कूल के बाहर धरने पर बैठ गए। शुरू में छात्रों को उम्मीद थी कि प्रशासन या शिक्षा विभाग का कोई अधिकारी मौके पर पहुंचकर उनकी बात सुनेगा, लेकिन देर शाम तक कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद छात्रों ने वहीं धरना जारी रखने का फैसला किया।

रात बढ़ने के साथ ठंड भी बढ़ती गई, लेकिन छात्रों का हौसला कम नहीं हुआ। छात्रों ने धरना स्थल पर ही भोजन किया और फिर स्कूल के बाहर टेंट लगाकर बिस्तर बिछाए, जहां उन्होंने पूरी रात गुजारी। सर्द रात में खुले आसमान के नीचे बच्चों का यूं धरने पर बैठना स्थानीय लोगों के लिए भी चिंता का विषय बन गया।

छात्रों के इस आंदोलन को ग्रामीणों और अभिभावकों का भी समर्थन मिला। बड़ी संख्या में पेरेंट्स और गांव के लोग धरना स्थल पर पहुंचे और बच्चों के साथ खड़े नजर आए। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों का भविष्य दांव पर है और अच्छे शिक्षकों का इस तरह बार-बार ट्रांसफर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करता है। उन्होंने मांग की कि लेक्चरर शंकरलाल जाट का ट्रांसफर तुरंत रद्द किया जाए।

मंगलवार सुबह भी धरना स्थल पर नारेबाजी और प्रदर्शन जारी रहा। छात्रों ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जाएगा, तब तक वे धरना खत्म नहीं करेंगे। वहीं, स्थानीय प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने से नाराजगी और बढ़ गई है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह छात्रों का सड़कों पर उतरना यह दर्शाता है कि वे अपने शिक्षकों से कितना जुड़ाव महसूस करते हैं। हालांकि, साथ ही यह भी जरूरी है कि प्रशासन समय रहते संवाद स्थापित करे, ताकि बच्चों को इस तरह की परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।

फिलहाल, पूरे इलाके की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि शिक्षा विभाग छात्रों और अभिभावकों की मांगों को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या लेक्चरर का ट्रांसफर वापस लिया जाता है या नहीं। यह मामला न केवल एक ट्रांसफर का विरोध है, बल्कि ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को भी उजागर करता है।